
शिल्प और सरस मेले का अवलोकन, ज्योतिसर के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का भी लिया जायजा
नई दिल्ली, 2 दिसंबर – केंद्रीय ऊर्जा और आवासन मंत्री मनोहर लाल, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2024 (आईजीएम-2024) के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार होते हुए देखा, बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने महोत्सव के बढ़ते स्वरूप और लोक कलाकारों, पर्यटकों, और शिल्पकारों के उत्साह को देखा। इस अवसर पर, वे ब्रह्मसरोवर के तट पर बिखरी विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक छटा से बेहद प्रभावित हुए। महोत्सव में भाग ले रहे पर्यटकों और शिल्पकारों से बातचीत करते हुए, उन्होंने लोक कलाकारों के वाद्य यंत्रों की धुन पर गुनगुनाते हुए मन की बात साझा की।
मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल की भूमिका बेहद अहम रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गीता महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का विजन दिया था, और इस कार्य में हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल की भूमिका बेहद अहम रही है। उन्होंने 2016 से इस महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने की शुरुआत की थी।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का दौरा:
केंद्रीय मंत्री ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) कार्यालय का दौरा किया, जहां उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने 48 कोस के 182 तीर्थों के विकास, व्यवस्थाओं और महोत्सव को और भव्य बनाने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा की।
शिल्प और सरस मेले का अवलोकन:
इसके बाद, मनोहर लाल ने शिल्प और सरस मेले का अवलोकन किया और ब्रह्मसरोवर का दौरा किया। उन्होंने पर्यटकों, कलाकारों और शिल्पकारों से बातचीत की, और महोत्सव की व्यवस्थाओं के बारे में फीडबैक लिया।
ज्योतिसर के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का निरीक्षण:
मंत्री ने गीता स्थली ज्योतिसर का भी अवलोकन किया और पवित्र स्थल को नमन किया। इस अवसर पर, उन्होंने 206 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन ज्योतिसर अनुभव केंद्र और संग्रहालयों के भवनों के साथ-साथ अन्य परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
गीता महोत्सव को और बड़ा बनाने के प्रयास:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईजीएम में आने वाले पर्यटकों और यात्रियों को पवित्र ग्रंथ गीता के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि वे कुरुक्षेत्र की पावन धरा से वापस अपने घरों में जाकर भी गीता का पाठ करें। उन्होंने केडीबी से आग्रह किया कि वह इन लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखें और आने वाले समय में इन लोगों को महोत्सव में आमंत्रित करें।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि महोत्सव को बड़े संस्थानों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाए ताकि सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के तहत सहयोग मिल सके। साथ ही, एक लोकल तीर्थ यात्रा सर्किट योजना तैयार करने की आवश्यकता जताई, जिससे तीर्थ यात्री कुरुक्षेत्र के विभिन्न तीर्थों का भ्रमण कर सकें।
पिपली नीलधारी गुरुद्वारा साहिब में संतों से मुलाकात:
इन कार्यक्रमों के बाद, केंद्रीय मंत्री पिपली स्थित नीलधारी गुरुद्वारा साहिब पहुंचे। यहां उन्होंने संतों और गणमान्य लोगों से बातचीत की और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेका।
सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की योजना:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में भाग लेने वाले पर्यटकों और यात्रियों को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को देखने और समझने का अवसर मिलता है। महोत्सव पहले ही कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, लंदन और श्रीलंका में आयोजित किया जा चुका है। सरकार का प्रयास है कि गीता के उपदेशों को दुनिया भर में फैलाया जाए, ताकि यह पवित्र ग्रंथ वैश्विक स्तर पर लोगों तक पहुंचे।