नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026
ईरान में बढ़ते संकट और अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई के बीच भारत की कूटनीति अचानक केंद्र में आ गई है। बीते 24 घंटों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर को दो बड़े फोन कॉल्स मिले — एक अमेरिका से और दूसरा ईरान से।
बुधवार देर शाम ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने जयशंकर से फोन पर बातचीत की। इस दौरान ईरान और उसके आसपास तेजी से बदलती परिस्थितियों पर चर्चा हुई। यह बातचीत भारत द्वारा ईरान में मौजूद नागरिकों को देश छोड़ने की एडवाइजरी जारी करने के कुछ ही घंटों बाद हुई।
भारत की एडवाइजरी:
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे विमान या अन्य साधनों से ईरान छोड़ दें। छात्रों, तीर्थयात्रियों, कारोबारियों और पर्यटकों को विशेष सतर्क रहने और प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। सभी नागरिक अपने पासपोर्ट, आईडी और अन्य इमिग्रेशन दस्तावेज अपने पास रखें और दूतावास से संपर्क बनाए रखें।
अमेरिका की चेतावनी और ट्रंप की धमकी:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार को चेताया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी की हत्या की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने और सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने की सलाह भी दी, जिससे अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की चेतावनी दी है।
फोन डिप्लोमेसी का महत्व:
विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सबसे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फोन किया, जिसमें ट्रेड और आर्थिक संबंधों पर चर्चा हुई। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘रूटीन कॉल’ नहीं थी। इसके ठीक 24 घंटे के भीतर ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को फोन किया, संभवतः अमेरिका तक संदेश पहुंचाने या भारत की कूटनीतिक मदद लेने के लिए।
इन दोनों फोन कॉल्स के बीच भारत ने अपनी एडवाइजरी जारी की, कतर से अमेरिकी सैनिक हटने लगे और ईरान ने पड़ोसियों को चेतावनी दी। विशेषज्ञ इसे युद्ध से पहले की कूटनीतिक गतिविधियों का संकेत मान रहे हैं।
निष्कर्ष:
ईरान में जारी संकट के बीच भारत की भूमिका बेहद अहम हो गई है। जयशंकर के इन फोन कॉल्स ने यह साफ कर दिया कि भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन साधने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
