काशी से बड़ी खबर: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यूजीसी नियमों और केंद्र सरकार पर तीखा हमला
वाराणसी, 30 जनवरी 2026
काशी पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूजीसी के नए नियमों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर कड़ा विरोध जताया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में अब लोगों को न्याय की कोई उम्मीद नहीं रह गई है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी के नए नियमों को सीधे तौर पर सनातन धर्म के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह नियम जानबूझकर इस तरह लाए गए हैं, ताकि समाज की वास्तविक समस्याओं और सरकार की कमियों पर चर्चा न हो सके। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था हिंदू समाज को आपस में लड़ाने का माध्यम बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा करना और समाज को टकराव की दिशा में ले जाना पूरे सनातन समाज के लिए घातक साबित होगा। शंकराचार्य के अनुसार, यदि एक ही परिवार के लोग आपस में लड़ेंगे तो नुकसान दोनों पक्षों का ही होगा।
इसी कारण उन्होंने सवर्ण समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों से भी सड़कों पर उतरकर इस कानून का विरोध करने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू समाज को दो हिस्सों में बांटने का यह एक सुनियोजित प्रयोग है और इसके जरिए सनातन पर सीधा प्रहार किया जा रहा है।
शंकराचार्य ने कहा कि मंचों से एकता की बातें की जाती हैं, लेकिन नीतियों के ज़रिये समाज को बांटने का काम हो रहा है।
इस दौरान उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि यह कानून संसद से पारित है और सुप्रीम कोर्ट इसमें बहुत अधिक हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का दायित्व केवल यह देखना है कि कोई कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं, लेकिन सरकार को ऐसे कानून तुरंत वापस लेने चाहिए, जो समाज को नुकसान पहुंचाते हों।
प्रयागराज माघ मेले के दौरान हुए विवाद पर भी उन्होंने नाराज़गी जाहिर की। शंकराचार्य ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन उनके शिष्यों और बटुकों के साथ पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बटुकों की चोटी पकड़कर उन्हें अपमानित किया गया, लेकिन अब तक न तो किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही सरकार की ओर से माफी मांगी गई है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने 11 दिनों तक प्रशासन को अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसे उन्होंने अकल्पनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर भी शंकराचार्य ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए, न कि किसी के आदेश का इंतजार करना चाहिए।
अंत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि देश में तानाशाही जैसी स्थिति बनती जा रही है और सरकार की नीतियां समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रही हैं। उनके अनुसार, यूजीसी के नए नियम न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि पूरे सनातन समाज के भविष्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।
