जम्मू-कश्मीर, 31 जनवरी 2026
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के डोलगाम इलाके में इस समय सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच एक हाई-अलर्ट ऑपरेशन जारी है। यह कार्रवाई भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा चलाए जा रहे काउंटर-टेरर ऑपरेशन ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के तहत की जा रही है।
शनिवार सुबह करीब 5 बजकर 40 मिनट पर सुरक्षाबल डोलगाम के सामान्य क्षेत्र में आतंकियों के काफी नज़दीक पहुंच गए थे। जैसे ही आतंकियों को जवानों की मौजूदगी का पता चला, उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत अपनी पोजिशन बदली और जवाबी कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी और मजबूत कर दी।
खुफिया एजेंसियों से मिले पुख्ता और सक्रिय इनपुट को एक-दूसरे से मिलाकर इस पूरे ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई थी। व्हाइट नाइट कोर के अनुसार, सभी स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का समन्वय करने के बाद ही ज़मीन पर कार्रवाई शुरू की गई।
सुरक्षाबलों का आकलन है कि इस इलाके में जैश-ए-मोहम्मद संगठन से जुड़े 2 से 3 आतंकवादी छिपे हुए हैं, जिनमें पाकिस्तानी मूल का एक कमांडर भी शामिल हो सकता है। इन्हीं आतंकियों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।
डोलगाम और आसपास का क्षेत्र ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों और भारी बर्फबारी से घिरा हुआ है, जिससे ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। इसके बावजूद आतंकियों के भागने के किसी भी रास्ते को बंद करने के लिए अतिरिक्त टुकड़ियों को मौके पर तैनात किया गया है और पूरे इलाके को चारों ओर से सील कर दिया गया है।
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 14 दिनों में यह चौथी बार है जब किश्तवाड़ जिले के इसी बेल्ट में सुरक्षाबलों का आतंकियों से संपर्क हुआ है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह इलाका फिलहाल आतंकियों की सक्रिय मूवमेंट का अहम केंद्र बना हुआ है।
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबल ड्रोन, स्निफर डॉग्स और हेलीकॉप्टर की मदद से लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि आतंकियों की लोकेशन और उनके ठिकानों पर कड़ी नजर रखी जा सके।
सुरक्षा कारणों और किसी भी तरह के राष्ट्र-विरोधी दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से सिंहपोरा, चिंगम और चतरू समेत लगभग छह किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
अब तक चल रहे ऑपरेशन त्राशी-I के दौरान एक पैरा ट्रूपर शहीद हो चुका है, जबकि आठ जवान घायल बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षाबल खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लगातार आतंकियों की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं।
इसी बीच उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा भी किश्तवाड़ पहुंचे, जहां उन्होंने काउंटर-टेरर ग्रिड की समीक्षा की और जमीनी हालात का जायजा लिया।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इससे पहले 18, 22 और 24 जनवरी को भी इसी क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी, लेकिन तब आतंकी घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए थे। हालांकि, सुरक्षाबलों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और लगातार तलाशी अभियान जारी रखा।
फिलहाल डोलगाम इलाके में घेराबंदी पूरी तरह लागू है और सुरक्षाबलों का साफ लक्ष्य है — किश्तवाड़ के इस पहाड़ी बेल्ट में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के पूरे आतंकी समूह को पूरी तरह निष्क्रिय करना।
