दिल्ली,26 दिसंबर 2025
दिल्ली में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राजधानी की खराब एयर क्वालिटी को देखते हुए एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
जस्टिस विकास महाजन और विनोद कुमार की वेकेशन बेंच ने केंद्र सरकार को इस याचिका पर 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी के लिए तय की है। इससे पहले बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जीएसटी काउंसिल को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द बैठक कर एयर प्यूरीफायर पर लगने वाले जीएसटी को कम या पूरी तरह खत्म करने पर विचार करे।
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की बेंच ने दिया था। कोर्ट ने इस मामले में सरकार पर नाराजगी भी जताई। बेंच ने कहा कि जब राजधानी में वायु गुणवत्ता मापक बहुत खराब श्रेणी में है और हालात इमरजेंसी जैसे बने हुए हैं, तब भी एयर प्यूरीफायर पर टैक्स में राहत न देना समझ से परे है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर सरकार नागरिकों को साफ हवा नहीं दे पा रही है, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर को सस्ता बनाना चाहिए।
फिलहाल एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। याचिका में इसे मेडिकल डिवाइस घोषित करने और 5 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में लाने की मांग की गई है। वकील कपिल मदान द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि दिल्ली जैसे गंभीर प्रदूषण संकट में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम नहीं माना जा सकता। याचिका के अनुसार साफ इनडोर हवा अब स्वास्थ्य और जीवन के लिए जरूरी हो गई है।
उच्च जीएसटी दर इसे आम लोगों की पहुंच से बाहर कर देती है, जो मनमाना और असंवैधानिक है।
