स्थान: नई दिल्ली | तारीख: 9 जनवरी 2026
नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को देश की राजनीति से जुड़े एक बड़े और चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, अदालत ने इस मामले में 52 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी भी कर दिया है।
इस फैसले के साथ ही यह मामला अब ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश कर गया है, जहां अभियोजन पक्ष यानी सीबीआई को अपने आरोपों को सबूतों के साथ अदालत में साबित करना होगा।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
लैंड फॉर जॉब घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी सीबीआई के मुताबिक, रेलवे में ग्रुप-डी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन और संपत्तियां ली गईं।
आरोप है कि ये जमीनें और संपत्तियां सीधे या परोक्ष रूप से लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर की गईं। इस तरह सरकारी नौकरी के बदले निजी लाभ लेने का एक कथित नेटवर्क तैयार किया गया।
सीबीआई का दावा है कि यह सब एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत किया गया, जिसमें सरकारी पद और अधिकारों का दुरुपयोग हुआ।
राउज एवेन्यू कोर्ट का ताज़ा फैसला
कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद यह माना कि लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिसके आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय किए जा सकते हैं।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच नहीं की जाती, बल्कि यह देखा जाता है कि क्या मुकदमा चलाने लायक आधार मौजूद है या नहीं।इसी आधार पर कोर्ट ने कई आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए, जबकि 52 लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया गया कि उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं।
किन धाराओं में आरोप तय हुए?
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ:
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भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराएं
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
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आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी पद के दुरुपयोग से जुड़ी धाराएं
लगाई गई हैं। अब इन धाराओं के तहत पूरी सुनवाई और गवाहों की गवाही
