दिल्ली 9 फरवरी – दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बढ़त हासिल हुई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को इस चुनाव में करारा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी के 17 मौजूदा विधायकों को हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, भाजपा के सभी मौजूदा विधायकों ने अपनी सीट बरकरार रखी है।
मतदान प्रतिशत और प्रमुख दलों का प्रदर्शन इस चुनाव में भाजपा को कुल 45.56% मत प्राप्त हुए, जबकि आम आदमी पार्टी को 43.57% वोट मिले। कांग्रेस (INC) को 6.34%, जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 1.06%, लोक जनशक्ति पार्टी (LJPR) को 0.53%, AIMIM को 0.77%, बसपा (BSP) को 0.58%, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को 0.06% वोट मिले। वहीं, नोटा (NOTA) का प्रतिशत 0.57% रहा।
AAP को झटका: 17 सीटिंग विधायक हारे आम आदमी पार्टी को इस चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि उसके 17 मौजूदा विधायक अपनी सीट नहीं बचा सके। इनमें बड़े नाम शामिल हैं:
- अरविंद केजरीवाल (नई दिल्ली)
- मनीष सिसोदिया (पटपड़गंज)
- सोमनाथ भारती (मालवीय नगर)
- राजेश गुप्ता (वज़ीरपुर)
- सत्येंद्र जैन (शकूर बस्ती)
- रघुविंदर शौकीन (नांगलोई जाट)
- शिवचरण गोयल (मोती नगर)
- राखी बिड़लान (मादीपुर)
- विनय मिश्रा (द्वारका)
- जय भगवान उपकार (बवाना)
- सौरभ भारद्वाज (ग्रेटर कैलाश)
- अखिलेश पति त्रिपाठी (मॉडल टाउन)
- महेंद्र यादव (विकासपुरी)
- शरद कुमार (नरेला)
- प्रमीला टोकस (आरके पुरम)
- दिनेश मोहनिया (संगम विहार)
- बंदना कुमारी (शालीमार बाग)
भाजपा के मौजूदा विधायकों की जीत दूसरी ओर, भाजपा के सभी मौजूदा विधायकों ने जीत दर्ज की है। इन विधायकों में शामिल हैं:
- अजय महावर
- विजेंदर गुप्ता
- अभय वर्मा
- जीतेंद्र महाजन
- मोहन सिंह बिष्ट
- ओम प्रकाश शर्मा
चुनाव परिणामों का असर और आगे की रणनीति इन चुनाव परिणामों के बाद दिल्ली की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। भाजपा की इस जीत को केंद्र सरकार की नीतियों और संगठन की मजबूत रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। वहीं, आम आदमी पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत होगी, क्योंकि पार्टी की कई प्रमुख हस्तियों को हार का सामना करना पड़ा है।
कांग्रेस की स्थिति में भी कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला और पार्टी अपने न्यूनतम मत प्रतिशत पर ही बनी रही। अन्य दलों को भी चुनाव में खास सफलता नहीं मिली।
अब सभी की नजरें नई सरकार के गठन और दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य पर हैं, जहां भाजपा की जीत से संभावनाएं बदल सकती हैं।


