
नई दिल्ली, 11 नवंबर 2024 – देहरादून, उत्तराखंड – उत्तरजन साहित्य संवाद द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में इस बार युवा कवित्री अनामिका गायत्री ने अपनी विशेष प्रतिभा का प्रदर्शन किया। देहरादून में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख कवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया, जिसमें अनामिका गायत्री की कविताओं ने विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इस काव्य गोष्ठी में अनामिका गायत्री ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज की सशक्त आवाज को प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं में गहरी संवेदनशीलता, समकालीन मुद्दों पर स्पष्ट दृष्टिकोण और भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति दिखाई दी। उनके शब्दों में एक प्रखर सामाजिक चेतना थी, जिससे श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कविता के क्षेत्र में अनामिका की प्रतिभा को विशेष पहचान मिल रही है। उन्होंने अपनी कविता में महिलाओं के अधिकार, समाज की असमानताओं और पर्यावरणीय संकट जैसे मुद्दों को बखूबी उठाया। उनकी कविताओं में एक नई ऊर्जा और उम्मीद का संदेश था, जो श्रोताओं को प्रेरित करने वाला था।
कार्यक्रम की मुख्य बातें:
- काव्य गोष्ठी का उद्घाटन: इस आयोजन का उद्घाटन देहरादून के प्रमुख साहित्यकारों और समाजसेवियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि और साहित्यकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित कविताएँ शामिल थीं।
- युवा कवित्री अनामिका गायत्री की प्रस्तुति: अनामिका गायत्री ने अपनी कविता “हमेशा जागती आँखों से” के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया, बल्कि उन्होंने समाज के सामूहिक संघर्ष और परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाले विचार भी प्रस्तुत किए। उनकी कविता में गहरे संदेश थे, जो समाज में व्याप्त असमानताओं और स्त्री के अधिकारों पर प्रकाश डालते थे।
- साहित्यिक चर्चाएँ और विचार-विमर्श: काव्य गोष्ठी के बाद, साहित्यिक चर्चाओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी साहित्य के भविष्य, कविताओं की सामाजिक जिम्मेदारी और युवाओं की भूमिका पर विचार विमर्श हुआ। युवा कवि और कवित्रियाँ, जैसे अनामिका, जिनकी आवाज़ अब साहित्यिक मंचों पर सुनाई दे रही है, उन्हें भी मंच प्रदान किया गया।
काव्य गोष्ठी की सफलता: उत्तरजन साहित्य संवाद की काव्य गोष्ठी में अनामिका गायत्री जैसे युवा कवियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया। इस कार्यक्रम ने साबित किया कि हिंदी कविता के क्षेत्र में नए विचार, संवेदनाएँ और विचारशील कवि-पाठक हमेशा समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
अनामिका की कविताएँ न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभवों की कहानी कहती हैं, बल्कि समाज में व्याप्त विभिन्न कुरीतियों और असमानताओं के खिलाफ एक सशक्त आवाज भी प्रदान करती हैं। उनकी कविता में एक अद्भुत ऊर्जा और विश्वास की झलक मिलती है, जो आज के समय में हर व्यक्ति को अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करती है।
इस काव्य गोष्ठी के आयोजन ने यह दिखाया कि साहित्य और कविता न केवल एक कला रूप हैं, बल्कि यह समाज के जागरूक नागरिक बनने की दिशा में भी मार्गदर्शक होते हैं।