
मतदान प्रक्रिया की संदिग्ध कार्यप्रणाली से मतदाताओं का हुआ मोहभंग: करण दलाल
गुरुग्राम, 3 मार्च: कांग्रेस के गुड़गांव प्रभारी एवं पलवल के पूर्व विधायक करण सिंह दलाल ने हरियाणा में हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों में कम मतदान प्रतिशत को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की संदिग्ध कार्यप्रणाली के कारण ही जनता का मतदान प्रक्रिया से मोहभंग हुआ है, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
भाजपा की नीतियों से जनता नाराज: करण दलाल
करण दलाल ने कहा कि हरियाणा में जनता का भाजपा से मोहभंग हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि 2019 के विधानसभा चुनावों में जनता ने कांग्रेस को जिताने के लिए मतदान किया था, लेकिन भाजपा ने सत्ता हथियाने के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से मतदाता चुनावी प्रक्रिया से निराश हो गए हैं, जिसका असर अब निकाय चुनावों में कम मतदान के रूप में दिखाई दे रहा है।
ईवीएम पर विश्वास, वोटर पर नहीं?
पूर्व विधायक ने भाजपा पर ईवीएम में हेरफेर का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों को अब यह समझ आ गया है कि भाजपा को वोटरों से अधिक ईवीएम पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि जनता को यह महसूस होने लगा है कि चाहे वे वोट डालें या न डालें, चुनावी नतीजे पहले से ही तय होते हैं। इसी कारण गुरुग्राम सहित कई स्थानों पर मतदान का बहिष्कार देखने को मिला।
वीवीपैट की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
करण सिंह दलाल ने हरियाणा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निकाय चुनावों में वीवीपैट (VVPAT) मशीनें नहीं लगाई गईं। आयोग का यह कहना कि पर्याप्त मात्रा में वीवीपैट उपलब्ध नहीं हैं, पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने इसे एक साजिश करार देते हुए कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्यपाल तक पहुंचाया, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मतदाता असंतोष और खराब प्रशासन
करण दलाल ने दावा किया कि भाजपा सरकार की असफल नीतियों और विकास के झूठे दावों से जनता तंग आ चुकी है। उन्होंने कहा कि निकाय प्रशासन शहरों की दुर्दशा को लेकर पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जिसके कारण लोगों ने चुनावी प्रक्रिया को ही नकार दिया।
🔹 “गुरुग्राम सहित कई शहरों में जनता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंची। यह सरकार के प्रति गहरा असंतोष और चुनावी प्रक्रिया में विश्वास की कमी को दर्शाता है।” – करण दलाल
कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल के इन आरोपों से हरियाणा की निकाय चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा की नीतियों और ईवीएम को लेकर बार-बार उठ रहे विवादों ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाता है और भाजपा इन आरोपों का क्या जवाब देती है।