नई दिल्ली, 24 जनवरी 2026
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बंटवारे का मामला फिर से सुर्खियों में है। इस बार इस विवाद में चीन की सक्रियता और बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की हरकतें इसे और जटिल बना रही हैं।
चीन और यूनुस की रणनीति
यूनुस ने हाल ही में चीन का दौरा किया और वहां उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों यानी ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र करते हुए भारत को लैंडलॉक्ड बताया।
इसके बाद बांग्लादेश ने चीनी दूत याओ वेन को तीस्ता मास्टर प्लान के तहत सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक के पास प्रोजेक्ट का दौरा कराने के लिए आमंत्रित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल तकनीकी महत्व का नहीं है, बल्कि इसमें भू-राजनीतिक और सामरिक महत्व भी शामिल है। चिकन नेक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाला संवेदनशील मार्ग है।
बांग्लादेश का नया बैराज
यूनुस सरकार ने पद्मा नदी पर नया बैराज बनाने की योजना का ऐलान किया है।
-
इस परियोजना की लागत लगभग 50443.64 करोड़ टका (₹37836 करोड़) है।
-
उद्देश्य: मानसून के दौरान अतिरिक्त जल संग्रहित करना और सालभर देश के कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 की फरक्का जल संधि इस साल समाप्त होने वाली है।
-
बांग्लादेश चाहता है कि शुष्क मौसम में गारंटीड जल मिले।
-
भारत अपनी घरेलू जरूरतों और पश्चिम बंगाल की मांग को देखते हुए संशोधन चाहता है।
चिकन नेक की सामरिक अहमियत
सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों का जीवनरेखा मार्ग है।
-
सबसे संकीर्ण हिस्से में इसकी चौड़ाई केवल 20 किलोमीटर है।
-
यह मार्ग नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के बिल्कुल पास स्थित है।
-
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान और चीन मिलकर इस क्षेत्र को टारगेट कर सकते हैं।
इसलिए इसे सामरिक दृष्टि से सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
भारत की सुरक्षा प्रतिक्रिया
भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
-
ऑपरेशन सिन्दूर के बाद यहाँ चौकसी बढ़ा दी गई है।
-
गृह मंत्री अमित शाह ने चेतावनी दी: “शत्रु को कभी कमजोर न समझें।”
-
गृह मंत्रालय ने BSF, CRPF, ITBP, SSB और CISF के जवानों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और सभी को ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कदम सीमा पर मादक पदार्थ, हथियार और नकली नोटों की तस्करी रोकने और संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए उठाया गया है।
निष्कर्ष
तीस्ता प्रोजेक्ट, चिकन नेक और चीन की बढ़ती भागीदारी भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई चुनौतियां पैदा कर रही है।
-
इससे न केवल क्षेत्रीय कूटनीति, बल्कि
-
दक्षिण एशिया में जल और सामरिक सुरक्षा की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।
