नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026
आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार ने बुधवार को दो बेहद अहम और दूरगामी फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर देश के करोड़ों उद्योगी लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में एक तरफ जहां अटल पेंशन योजना को वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया, वहीं दूसरी ओर एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया यानी सिडबी को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने की मंजूरी दी गई।
सबसे पहले बात अटल पेंशन योजना की करें। यह योजना असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों, घरेलू कामगारों और छोटे कारीगरों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। सरकार ने इस योजना को 2030 तक जारी रखने के साथ-साथ इसके प्रचार, जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए भी वित्तीय सहयोग जारी रखने का फैसला किया है। जनवरी 2026 तक इस योजना से 8 करोड़ 66 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद अंशदान के आधार पर 1,000 से 5,000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है। यह फैसला उन करोड़ों लोगों को यह भरोसा देता है कि बुढ़ापे में उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
अब बात करते हैं दूसरे बड़े फैसले की, जो MSME सेक्टर से जुड़ा है। सरकार ने सिडबी को 5,000 करोड़ रुपये की Equity पूंजी तीन चरणों में देने का निर्णय लिया है। इससे सिडबी की निवेश संबंधी स्थिति मजबूत होगी और वह छोटे उद्योगों को कम ब्याज दर पर ज्यादा कर्ज दे सकेगा। सरकार का मानना है कि इस निवेश से करीब 25 लाख नए MSME इससे जुड़ेंगे और लगभग 1 करोड़ 12 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
MSME सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। जब छोटे उद्योगों को सस्ता कर्ज मिलता है, तो वे विस्तार करते हैं, उत्पादन बढ़ाते हैं और ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इससे जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।
कुल मिलाकर, ये दोनों फैसले यह संकेत देते हैं कि सरकार का फोकस सिर्फ विकास पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन पर भी है। कमजोर वर्ग को पेंशन की सुरक्षा और छोटे उद्योगों को पूंजी का सहारा—यही इन फैसलों की असली ताकत है।
