सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में पर्यटकों का मन मोह रही बहुसांस्कृतिक छटा
कला, संस्कृति और परंपरा का संगम बनकर उभर रहा शिल्प महोत्सव
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में पर्यटकों का मन मोह रही बहुसांस्कृतिक छटा
फरीदाबाद हरियाणा, 11 फरवरी – 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026 मेले में उमड़े देश-विदेश के पर्यटक यहां की बहुसांस्कृतिक विरासत और जीवंत माहौल का भरपूर आनंद उठा रहे हैं। मेले में आए लोगों के चेहरे पर उत्साह, जिज्ञासा और खुशी साफ झलक दिखाई दे रही है, जिसे कैंडिड फोटोग्राफ्स के माध्यम से खूबसूरती से कैद किया गया है।
आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में विभिन्न राज्यों एवं देशों की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। कहीं मिट्टी, लकड़ी, धातु और कपड़े से बनी कलाकृतियां लोगों को लुभा रही हैं तो कहीं कलाकार अपनी जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह रहे हैं।
मेले में महिलाओं को लुभा रही उत्तर प्रदेश की हस्तनिर्मित रेडीमेड ड्रेस
मेला इस वर्ष भी देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और परिधानों की शानदार झलक देखने को मिल रही है। वर्ष 2026 के मेले में थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के स्टॉल विशेष रूप से चर्चा में हैं, जहां पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
मेले में पहुंच रहे पर्यटकों और खरीदारों का कहना है कि यहां उपलब्ध परिधानों में उत्कृष्ट कपड़ा, बेहतरीन सिलाई, आकर्षक रंग संयोजन और किफायती कीमत का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है। कई खरीदारों ने बताया कि वे इन रेडीमेड सूट और कुर्ती को दैनिक पहनावे के साथ-साथ त्योहारों तथा विशेष अवसरों के लिए भी खरीद रहे हैं।
मेला भारतीय संस्कृति, परंपरा और हस्तकला को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की भागीदारी इस मेले को और अधिक समृद्ध और रंगीन बना रही है। यहां प्रस्तुत हस्तनिर्मित परिधान न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शा रहे हैं, बल्कि भारतीय कारीगरों की मेहनत, कला और रचनात्मकता का भी शानदार उदाहरण हैं।
बीन-बाजे की धुन और थाप से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हरियाणवी लोक कलाकार
मेले में हरियाणवी लोक कलाकार अपनी बीन और बाजे की मधुर धुन और थाप से देश-विदेश से आए पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। मेला परिसर में गूंजती बीन की सुमधुर धुन और ढोलक-नगाड़ों की ताल ने मेला परिसर के वातावरण को जीवंत और उल्लासपूर्ण बना दिया है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक पेश कर रहे हैं।
मेले में आने वाले महिलाएं, बच्चे और युवा बीन की लहराती धुन सुनते ही थिरकने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ कलाकार पर्यटकों को भी अपने साथ नृत्य करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जिससे पूरा मेला परिसर उत्साह और ऊर्जा से भर हुआ है।
महोत्सव में हरियाणवी रागनियों, घूमर, फाग और अन्य पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कलाकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें अपनी कला को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का सुअवसर प्रदान करता है। वहीं, पर्यटक भी हरियाणा की लोक संस्कृति से रूबरू होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
गरवी गुरजारी परिसर में सिल्क और मिरर वर्क कर रहा आकर्षित
गुजरात के शिल्पकारों के सूती पोशाक सामग्री, साड़ी, स्टोल, कुर्ते, घर की सजावट और फोल्डेबल चटाई उत्कृष्ट उत्पाद पर्यटकों को आ रहे पसंद
इस वर्ष भी गुजरात के शिल्पकार अपने पारंपरिक सिल्क और मिरर वर्क शिल्प के साथ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। महोत्सव के गरवी गुरजारी परिसर में सजे रंग-बिरंगे स्टॉल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यहां प्रदर्शित सूती पोशाक सामग्री, साडिय़ां, स्टोल, कुर्ते, घर की सजावट की वस्तुएं तथा फोल्डेबल चटाइयां उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक कारीगरी का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही हैं।
गुजरात से आए शिल्पकारों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों में महीन कढ़ाई, चमकदार शीशों की जड़ाई और जीवंत रंगों का प्रयोग किया है। सिल्क और मिरर वर्क की यह कला न केवल परंपरा की पहचान है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है। महोत्सव में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इन उत्पादों को विशेष रुचि से खरीद रहे हैं। गरवी गुरजारी परिसर में उपलब्ध सूती साडिय़ां और कुर्ते आरामदायक होने के साथ-साथ आधुनिक फैशन के अनुरूप भी हैं, जबकि स्टोल और डेकोरेटिव आइटम घर की सजावट में पारंपरिक स्पर्श जोड़ रहे हैं। फोल्डेबल चटाइयां अपनी उपयोगिता और आकर्षक डिजाइनों के कारण विशेष रूप से पसंद की जा रही हैं।
राजस्थान का स्पेशल अचार और नमकीन बने पर्यटकों की पसंद
अनारदाना, जीरा गोली और इमली लड्डू के मुरीद हुए लोग
मेले में देश-विदेश से आए हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के बीच इस बार राजस्थान के विशेष अचार और नमकीनों ने पर्यटकों का खास ध्यान आकर्षित किया है। रंग-बिरंगे स्टॉलों पर सजे पारंपरिक स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। खासतौर पर अनारदाना गोली, जीरा गोली और इमली लड्डू की खट्टी-मीठी चटकारेदार स्वाद ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को मुरीद बना दिया है।
अनारदाना और जीरा गोली पाचन के लिए लाभकारी मानी जाती है, वहीं इमली लड्डड्ढू का खट्टा-मीठा स्वाद हर आयु वर्ग को आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा आम, नींबू और मिर्च के आचार और पारंपरिक पापड़ की भी अच्छी खासी मांग है।
राजस्थान के अचार और नमकीनों की बढ़ती लोकप्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय पारंपरिक स्वाद की बात ही कुछ और है। महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के स्वाद एक ही स्थान पर मिलना एक अनोखा अनुभव है। कई पर्यटकों ने बताया कि वे हर वर्ष यहां आते हैं और राजस्थान के स्टॉल से विशेष रूप से खरीदारी करते हैं।
