- क्या गुरुग्राम पुलिस पकड़ पाएगी घोटाला बाद सरपंच को
- भाजपा समर्थक है सरपंच
- शिकोहपुर गांव की सड़क व गलियों में कैसे लगे आखिर 1500 स्पीड ब्रेकर, खर्च दिखाया 45.13 लाख रुपए
गुरुग्राम
दिल्ली जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम जिले का गांव शिकोहपुर के पूर्व सरपंच ने पंचायत अधिकारियों के साथ मिलकर जा हरियाणा सरकार को करीब 45 करोड़ से अधिक का घोटाला कर नुकसान किया वही अब गुरुग्राम पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार घोटालेबाज सरपंच को और पंचायत अधिकारी को कब गिरफ्तार करेगी गुरुग्राम पुलिस हरियाणा सरकार के भ्रष्टाचार हरियाणा को पलीता लगा रहे सरपंच और पंचायत के कुछ अधिकारी अपनी मनमर्जी कर घोटाला से दाग लगा रहे हैं मुख्यमंत्री की साब सभी पर.
वैसे तो सरपंच लखन सिंह भाजपा के पूर्व मंत्री के नजदीकी बताए जा रहे हैं इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार क्या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पाएगी या नहीं.
मुकदमा दर्ज होने के बावजूद भी खुलेआम घूम रहा है सरपंच
भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद भी सरपंच लखन सिंह को सरकार व प्रशासन का भय नहीं है और सरेआम घूम रहा है जबकि अगर कोई छोटा सा चोरी का मामला दर्ज हो जाता है तो पुलिस उसके दरवाजे पर दमक जाती है लेकिन करोड़ों के घोटाला और मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस अभी तक सरपंच के घर पर झांक नहीं पाई है इससे साफ जाहिर होता है कहीं ना कहीं घोटाले में किसी बड़े सफेदपोश नेता का हाथ है.
ज्ञात हो कि नगर निगम में शामिल होने से पहले शिकोहपुर गांव में पूर्व सरपंच लखन सिंह व तत्कालीन ग्राम सचिव के खिलाफ करोड़ों रुपए का गबन करने को लेकर खेड़कीदौला थाना में केस दर्ज किया गया है. इस पूरे मामले में एडीसी विश्राम कुमार मीणा ने जांच की, जिसमें मानेसर निगम में शामिल होने से पहले शिकोहपुर गांव में तेजी से विकास कार्य करवाए गए. सबसे अचंभित करने वाला गबन स्पीड ब्रेकर का दिखाई दिया, जिसमें गांव में ही 1500 स्पीड ब्रेकर लगाए दिखाए गए हैं, जिस पर 45.13 लाख रुपए खर्च दिखाए गए हैं. वहीं शिकायतकर्ता शिशुपाल ने गबन की शिकायत तत्कालीन डीसी अमित खत्री को शिकायत दी थी. लेकिन इस मामले की जांच तत्कालीन लोकल एसडीओ को सौंपी दी गई, लेकिन जांच में कोई अनियिमितता नहीं दिखाई गई. इसके बाद दोबारा शिकायत करने पर एडीसी विश्राम कुमार मीणा को जांच सौंपी, जिसमें मौका निरीक्षण में कई विकास कार्य जो कागजों में करोड़ों रुपए के कराए गए, जो गांव में हुए ही नहीं मिले. इस पर एडीसी की जांच रिपोर्ट के बाद बीडीपीओ फर्रुखनगर नरेश कुमार की शिकायत पर केस दर्ज कराया गया है.

इस संबंध में शिकायतकर्ता शिशुपाल ने 9 जून 2022 को डीसी को शिकायत दी थी. 24 दिसंबर 2020 को शिकोहपुर गांव को मानेसर निगम में शामिल कर लिया गया था. इससे पहले कई विकास कार्य तेजी से गांव में कराने के आरोप लगाए गए. इस मामले की जांच तत्कालीन डीसी अमित खत्री ने लोकल एसडीओ को सौंपी थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में कोई अनियमितता नहीं दिखाई गई. लेकिन शिकायतकर्ता ने दोबारा से जांच की मांग की तो इस पूरे मामले की जांच एडीसी विश्राम कुमार को सौंप दी गई. इस पर मानेसर निगमायुक्त कार्यालय से शिकोहपुर का पूरा रिकॉर्ड मंगवाया और पूरे रिकार्ड की गहनता से जांच की गई. 8 अप्रैल 2022 को एडीसी ने गांव में विकास कार्यों का मौका मुआयना किया गया. जिसमें विकास कार्यों में काफी अनियमिताएं मिली. साथ ही सरकार की हिदायतों, वित्तिय नियमों का उल्लंघन भी पाया गया। कई कार्य तो ऐसे पाए गए जो मौके पर भुगतान के पंचायत प्रस्ताव एवं बिल तिथि के समय मौके पर हुए ही नहीं.
इन बिंदुओं में मिला गबन
शिकोहपुर पंचायत की कार्यवाही पुस्तिका के अनुसार गांव में 1500 मीटर तक स्पीड ब्रेकर लगवाए गए हैं. जबकि एडीसी ने अवलोकन में पाया कि ग्राम पंचायत शिकोहपुर में 1500 स्पीड ब्रेकर लगाने की जरूरत नहीं है. जिसके लिए अमन ट्रेडिंग कंपनी से 4513500 का सामान खरीदा गया. इतनी बड़ी राशि की खरीद नियमानुसार टैंन्डर प्रक्रिया से की जानी चाहिए थी, जो नहीं कराई गई. इसके अलावा बास्केटबॉल कोर्ट के निर्माण पर 58.44 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि एडीसी ने निरीक्षण में पाया कि बॉस्केटबॉल कोर्ट गांव में है ही नहीं. इस राशि का भुगतान 2020 में कर दिया गया था. साथ ही ग्राम सचिव व सरपंच ने ना तो कोई प्रस्ताव पारित नही कराया और ना ही कोई टैन्डर प्रक्रिया की गई. फुटबॉल ग्राउंड पर 96.85 लाख रुपए खर्च किए गए, जो कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज हैं. जिसमें फुटबॉल ग्राउंड निर्माण पर 19.24 लाख रुपए, तार, दवाई व खाद के लिए 19.27 लाख रुपए, घास व हारटो स्प्रे पर 19.62 लाख रुपए, फुटबॉल ग्राउंड की फिलिंग, खेल का के सामान पर 18.86 लाख रुपए व फव्वार आदि पर 19.83 लाख रुपए खर्च किए गए. जबकि निरीक्षण में फुटबाल ग्राउंड की जगह खाली जमीन पड़ी मिली. इसके अलावा पशु अस्पताल 83.57 लाख रुपए खर्च किए गए. जबकि अवलोकन में पाया कि इस कार्य में भी टेंडर प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई. इसके अलावा अस्पताल में शैड लगाया गया है, जबकि मौके पर कोई शैड नहीं मिला. इसके अलावा क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण पर 1.87 करोड़ रुपए खर्च किए गए जबकि मौके पर इसके निर्माण में भी अनियमितताएं बरती गई.
गांव में कराई कलाकृति पर भी खर्च किए 1.60 करोड़ रुपए
शिकोहपुर गांव में सरपंच व ग्राम सचिव द्वारा कलाकृतियों बनवाने पर 1.60 करोड़ रुपए खर्च कर दिए. जबकि एडीसी विश्राम कुमार मीणा ने इस संबंध कमेंट किया है कि इस मामले में अनियमितताएं बरती गई और ना ही गांव में इतनी बड़ी राशि कलाकृतियों पर खर्च करने की जरूरत थी. इसके अलावा गांव में सोलर लाइट लगवाने पर 4.46 करोड़ रुपए खर्च किए गए. जिसका सामान उच्च रेट में खरीदा गया, जिससे एडीसी ने इस मामले में जानबूझकर गबन करने की बात कही है.