- ढाई वर्ष से मानेसर निगम के चुनाव का इंतजार, पांच महीनों से गुरुग्राम निगम के बिना चुनाव के
- जेई से लेकर उच्च अधिकारियों की मौज पर मौज
गुरुग्राम, 1 अप्रैल।
पिछले ढाई वर्षों से मानेसर नगर निगम चुनाव की तैयारी कर रहे विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशी एवं निर्दलीय प्रत्याशी व पार्षद एवं मेयर के दावेदारों को उस समय बड़ा झटका लगा जब उन्हें जानकारी मिली कि नगर निगम के चुनाव आगे बढ़ा दिए और अब मानेसर नगर निगम के चुनावों को लेकर सरकार की तरफ से अभी कोई साफ संदेश नहीं है लेकिन जिन मेयर पद के उम्मीदवारों को अप्रैल मई में चुनाव का इंतजार था उनकी आशाओं पर पूरी तरह पानी फिर गया और जनता में जो गतिविधि तेज की हुई थी उस पर विराम लग गया.
पांच माह से अधिक समय से गुरुग्राम नगर निगम के चुनाव का भी इंतजार अब और बढ़ गया
5 महीने से अधिक का समय हो गया गुरुग्राम नगर निगम के मेयर एवं पार्षदों का समय समाप्त हुए और तभी से ही चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं लेकिन गुरुग्राम नगर निगम का चुनाव भी और आगे बढ़ा दिया गया है जिसके चलते गुरुग्राम नगर निगम के चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की तैयारी धरी रह गई और चुनाव के लिए खोले गए कार्यालय को भी धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं.
कहीं सत्ताधारी पार्टी को हार का डर तो नहीं था
दोनों नगर निगम के चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी यह कह रहे हैं की सत्ताधारी पार्टी को कहीं हार का डर तो नहीं सता रहा था इसलिए दोनों निगम के चुनाव को आगे बढ़ा दिया क्योंकि अधिकारियों द्वारा सरकार के लगातार छवि करना सरकार को गुप्त विभाग की तरफ से सूचना देना भी माना जा रहा है. सर्वे के अनुसार सरकार को जानकारी दी गई है कि यह समय नगर निगम चुनाव का नहीं है क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जिसके चलते गुरुग्राम जिले के लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है. वहीं भाजपा की बैठकों में भी वरिष्ठ नेताओं ने सक्रिय कार्यकर्ताओं ने अपने बड़े नेताओं को साफ शब्दों में कहा कि जब उनकी समस्या का समाधान नहीं होता तो आखिरकार जनता उन्हें वोट क्यों देगी यह बात भी भाजपा की कई बैठकों में उठती रही है जिसका कारण भी दोनों नगर निगम के चुनाव को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है.
निगम के जेई से लेकर उच्च अधिकारी की मौज
गुरुग्राम के दोनों नगर निगम चुनाव को आगे बढ़ाने से जहां चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में नाराजगी है वही अधिकारियों में खुशी की लहर है क्योंकि उन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है जेई से उच्च अधिकारियों की मौज आ रही है अगर चुनाव होते तो अधिकारियों की मनमानी नहीं चलती मगर अब कोई रोकने टोकने वाला नहीं है कर्मचारी और अधिकारी अपनी मनमर्जी से चल रहे हैं नगर निगम क्षेत्र में आने वाले गांव की जनता हाय तोब कर रही है लेकिन अधिकारियों को उन से कोई लेना देना नहीं है जिसके चलते जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है उद्योगपतियों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार के प्रति काफी नाराजगी दिखाई दे रही है.