नई दिल्ली
वर्ष 1994 में तुत्सी समुदाय के खिलाफ रवांडा में हुए भीषण नरसंहार की 29वीं वर्षगाँठ पर शुक्रवार, 07 अप्रैल 2023, शाम 6:30 रवांडा गणराज्य के भारत में नई दिल्ली स्थित उच्चायोग, संयुक्त राष्ट्र संघ एवं गांधी मण्डेला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में मीनाक्षी लेखी विदेश राज्य मंत्री और संस्कृति, भारत सरकार मौजूद रही. इसके अतिरिक्त सिंथिया मैककैफ्री, यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि भारत में रवांडा राजदूत मुकंगिरा जैकलीन, गांधी मंडेला,फाउंडेशन के सेक्रेटरी जनरल नंदन झा उपस्थित रहें. कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मीनाक्षी लेखी को पुष्पगुच्छ प्रदान कर तथा भारत और रवांडा गणराज्य के राष्ट्रीय गान द्वारा की गई. इसके बाद कार्यक्रम मे उपस्थित अतिथियों द्वारा क्विबुका गीत के साथ 29 मोमबत्तियां जलाकर तुत्सी समुदाय के लोगों को याद करते हुए एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि प्रदान की गई. मीनाक्षी लेखी ने कहा कि रवांडा मे हुए भीषण नर संहार से हम भारतीय परिचित रहे है. इतिहास मे भारत ने अनेकों नरसंहार को झेला है. यहाँ जजिया आदि के नाम पर अनेक आक्रांताओं ने संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया है. 1990 मे कश्मीर मे हुआ नरसंहार भी इसका एक उदाहरण है. भारत सदैव विकास और मानवीय मूल्यों के प्रसार को बढ़ावा देता आया है. वर्ष 2018 मे माननीय प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रवांडा दौरा सद्भाव व विकास पर बल दिया गया. वर्ष 1994 से 1996 के दौरान भारतीय सेना युनाइटेड नेशन की सेना के साथ रवांडा में शांति एवं सद्भावना का संदेश दिया. मीनाक्षी लेखी ने आगे कहा कि गांधी मण्डेला फाउण्डेशन महात्मा गान्धी व नेल्सन मण्डेला के शांति पथ पर चलकर विश्व मे सद्भावना का प्रसार कर रहा है.

कार्यक्रम मे स्कूली छात्रों द्वारा बनायी गई रवांडा नरसंहार की निर्ममता को व्यक्त करती हुई पेंटिग की प्रदर्शनी लगायी गयी जिसे वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया. इस दौरान छात्रों द्वारा mwakire indabo ( फूल प्राप्त करे) भावप्रद नाट्य मंचन किया गया।तथा रवाण्डा समुदाय से संबंधित बच्चों द्वारा मार्मिक संदेश दिया. इस दौरान क्विबुका गीत के माध्यम से दुर्दांत नरसंहार को स्मरण किया गया.
कार्यक्रम मे डॉक्यूमेंट्री फिल्म: द जेनोसाइड अगेंस्ट तुत्सी का प्रसारण किया गया।इस दौरान 50 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहें।
गांधी मंडेला फाउंडेशन के महासचिव नंदन झा ने कहा कि, “केवल 100 दिनों में 8 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिसके निशान आज भी हमें परेशान करते हैं. आइए हम पीड़ितों को याद करें, उनकी यादों का सम्मान करें और इस तरह के अत्याचारों को दोबारा होने से रोकने की दिशा में काम करने का संकल्प लें. “महामहिम सिंथिया मैककैफ्री, यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि द्वारा रवांडा में तुत्सी समुदाय के खिलाफ 1994 के नरसंहार पर अंतर्राष्ट्रीय चिंतन दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव का संदेश दिया गया. उन्होंने कहा कि – हम एकजुटता में एकजुट हैं और सभी समुदायों के बीच शांति, सहिष्णुता और समझ को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए संकल्प लेते हैं कि इतिहास के सबक कभी भुलाए नहीं जाएंगे.
रवांडा की उच्चायुक्त सुश्री जैकलीन मुकांगिरा द्वारा संबोधित किया गया. उन्होंने भारत व रवांडा के बीच परस्पर आत्मीय संबंध का जिक्र करते हुए. भारत सरकार का धन्यवाद किया. तथा रवांडा नरसंहार को याद करते हुए कहा कि तुत्सी समुदाय के खिलाफ हुए इस नरसंहार मे लगभग 8 लाख लोग मारे गए जो कि इतिहास के लिए एक काला धब्बा था. उन्होंने बताया कि इस नरसंहार में अनेक महिलाओं व बच्चों के साथ बलात्कार हुआ मैने इस नरसंहार मे अपने पिता बड़ी बहन व पिता को खोया है.

मानव इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक रवांडा में हुए इस नरसंहार पर विचार के लिए यूनेस्को द्वारा हर साल 7 अप्रैल को रवांडा में तुत्सी के खिलाफ 1994 के नरसंहार के प्रतिबिम्ब के रूप में अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है. इस दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2003 में की गई थी. यह दिन हुतु चरमपंथी नेतृत्व वाली सरकार द्वारा तुत्सी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए गए नरसंहार की याद दिलाता है. जिसके बाद 100 दिन में ही पूरे देश में करीब 10 लाख लोगों की मौत हुई. तुत्सी समुदाय के लोगों की निर्मम हत्या के बाद उनके घर लूट लिए गए थे. इसके बाद घरों में ही उनके शव जला दिए गए थे.
गांधी मंडेला फाउंडेशन
इस कार्यक्रम के आयोजन में गांधी मंडला फाउंडेशन अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. गांधी मंडेला फाउंडेशन वैश्विक शांति, अहिंसा और एकता के हित में महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के मूल्यों और आदर्शों एवं अहिंसावादी विचारों को बढ़ावा देता रहा है. फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य शांति एवं अहिंसा का संदेश वैश्विक स्तर पर युवाओं तक पहुँचाना है. गांधी मंडेला फाउंडेशन भारत सरकार द्वारा प्रमाणित ट्रस्ट है, जो दुनिया भर में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को बढ़ावा देता है. फाउन्डेशन का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.
