- पिछले चार साल में 5 लाख बच्चे शिक्षा व्यवस्था से बाहर हुए: अनुराग ढांडा
- 62 प्रतिशत बच्चे 10वीं कक्षा तक आते आते फेल हो जाते हैं: अनुराग ढांडा
- खट्टर सरकार ने 134ए को बंद किया और इनकी चिराग योजना भी फेल हुई: अनुराग ढांडा
- भाजपा और जजपा राजनीतिक विवाद पैदा कर लोगों का मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगे: अनुराग ढांडा
- सरकारी स्कूलों के 26 लाख बच्चों में से 8 लाख बच्चों ने ही 12वीं पास की: अनुराग ढांडा
- सिस्टम से बाहर हुए 18 लाख बच्चों की मौजूदा स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करें सरकार: अनुराग ढांडा
चंडीगढ़:आम आदमी पार्टी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने बुधवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की। उन्होंने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की शिक्षा को लेकर खट्टर सरकार को घेरा। उनके साथ आम आदमी पार्टी की एजुकेशन विंग के प्रदेश सचिव उमेश रत्न शर्मा भी मौजूद रहे।
आम आदमी पार्टी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ने कहा की हरियाणा के बच्चे सरकारी स्कूलों में बर्बाद हो रहे हैं। खट्टर सरकार ने हरियाणा के बच्चों की एक नस्ल को तबाह करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि 2022 में 4,26,690 बच्चे ऐसे थे जो कक्षा नौवीं और दसवीं में रजिस्टर हुए। इनमें से 2,27404 बच्चे नौवीं कक्षा में फेल हो जाते है और दसवीं तक 1,63,346 बच्चे ही पहुंच पाते हैं। और दसवीं में केवल 57% बच्चे ही पास हो पाते हैं, जोकि 94,281 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि 20% बच्चे 12 वीं में फेल हो जाते हैं। 75,424 बच्चे ही 12 वीं पास कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि नौंवी और दसवीं में दाखिला लेने वाले 100 बच्चों में से केवल 30 बच्चे ही बारहवीं पास कर पाते हैं। यानि 70 बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा की हरियाणा में स्कूलों में 26 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, इनमें से केवल 10 लाख 7 हजार ने दसवीं पास की। और इनमें से 8 लाख 6 हजार 208 बच्चे ही 12वीं पास कर पाते हैं। उन्होंने कहा सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 18 लाख बच्चे गुमनामी का जीवन जीने को मजबूर हैं।
अनुराग ढांडा ने बताया कि हरियाणा सरकार के पिछले चार साल के आंकड़ों के अनुसार, नौवीं और दसवीं में 2 लाख 650 बच्चे ड्रॉपआउट हुए। और केवल दसवीं में 3,01536 बच्चे फेल हो गए। यानि 5 लाख बच्चे शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो गए। उन्होंने कहा की 10वीं तक आते आते 62 प्रतिशत बच्चे फेल हो जाते हैं और 70 प्रतिशत बच्चे बारहवीं तक आते आते फेल हो जाते हैं।
वहीं आम आदमी पार्टी एजुकेशन विंग के प्रदेश सचिव उमेश रत्न शर्मा ने बताया कि हरियाणा के अंदर 60 लाख बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं। इसमें 26 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि यू डाइस, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में 62 फीसदी बच्चे दसवीं और 70 फीसदी 12वीं में फेल हो जाते हैं। उन्होंने बताया की प्रदेश के स्कूलों में 32 फीसदी बच्चे नौवीं कक्षा में फेल हो जाते हैं। सरकार की पॉलिसी के अनुसार, आठवीं तक किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया जाता है।
वहीं अनुराग ढांडा ने कहा कि सरकारी स्कूलों के पिछले तीन साल के आंकड़ों की बात करें तो सरकारी स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। बच्चों को ड्रेस नहीं मिली हैं। हरियाणा की सरकारी स्कूलों को शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया गया है। 134ए को बंद कर दिया, इससे बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला मिल सकता था और इनकी चिराग योजना भी फेल हो गई। चिराग योजना के स्कूलों में 92 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। सरकारी स्कूलों में 38000 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में 2600 स्कूलों में पीने का साफ पानी नहीं, 185 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। उन्होंने कहा 10 साल से प्रदेश के स्कूलों में 14,596 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए, इस पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। इन्हें खर्च करके प्रदेश के स्कूलों में काफी सुधार हो सकता था। खट्टर सरकार सुनियोजित तरीके से प्रदेश के बच्चों को बरबाद करने कर रही है। उन्होंने कहा खट्टर सरकार श्वेत पत्र लाकर प्रदेश के सामने आंकड़ों के साथ इन बातों को रखे कि कितने बच्चे बारहवीं तक पहुंचते पहुचते ड्रोप हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस साल बजट आया तो खट्टर सरकार कहती है 900 स्कूलों में बैंच लगवाएंगें। स्कूलों में बैंच अब लगवाएंगें तो पहले बच्चें कहां बैठते थे। स्कूलों में ना बैंच, ना पानी, ना शौचालय और ना बिजली, जब ये सुविधाएं नहीं हैं तो शिक्षा की बात तो बाद की है। प्रदेश में 1 लाख 80 हजार पद खाली पड़े हैं। अगर सरकार चाहे तो एक झटके में सभी पद भर सकती है। क्योंकि सरकार के पास साढे तीन लाख से ज्यादा बच्चे सीईटी क्वालीफाई हैं। लेकिन खट्टर सरकार युवाओं को बरबाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आम आदमी पार्टी सरकारी कांट्रेक्ट का भी कच्चा चिट्ठा खोलगी। महाराष्ट्र और कर्नाटक से ज्यादा कमीशनखोरी हरियणा में चल रही है।