- गुरुग्राम, 04 अगस्त : बरसात के समय शहर के सेक्टर 31 में होने वाली जलभराव की समस्या के निवारण के लिए डीसी निशांत कुमार यादव ने शुक्रवार को स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण किया। उनके इस निरीक्षण दौरे में नगर निगम गुरुग्राम व जीएमडीए के अधिकारी भी शामिल रहे। डीसी ने इस दौरान गुरुग्राम के गांव सिलोखरा में तालाबों के जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य का भी मौके पर जाकर जायजा लिया।
- डीसी निशांत कुमार यादव ने शुक्रवार को अपने निरीक्षण दौरे में सेक्टर 31 पहुँचकर जलभराव वाले प्रमुख बिंदुओं व उससे होने वाली जलभराव की समस्या का जायजा लिया। इस दौरान सेक्टर 31 के निवासियों की ओर सुझाव मिला कि यदि सेक्टर 31 हाईवे की ओर लगती ग्रीन बेल्ट में कैनाल ड्रेन बनाकर इसे ताऊ देवीलाल स्टेडियम होते हुए बादशाहपुर ड्रेन में छोड़ दिया जाए व ग्रीन बेल्ट के पार्क एरिया में एक तालाब का निर्माण करवा दिया जाए तो सेक्टर में होने वाली जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल पाएगी। डीसी ने उनके सुझाव का स्वागत करते हुए जीएमडीए के अधिकारियों से कहा कि वे इस सुझाव की संभावनाओं पर विचार कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। इस दौरान जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि वर्तमान में जीएमडीए की ओर से एसपीआर के साथ लेग फ़ॉर का निर्माण किया जा रहा है। यह निर्माण कार्य पूरा होते ही बादशाहपुर ड्रेन पर पानी का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
- गुरुग्राम गांव में द्रोणाचार्य तालाब को फिर से मिलेगा ऐतिहासिक स्वरूप
- डीसी ने जिला कष्ट निवारण समिति के बैठक में आई शिकायत के आधार पर आज गुरुग्राम गांव के ऐतिहासिक द्रोणाचार्य तालाब का भी निरीक्षण किया। इस दौरान जिला कष्ट निवारण समिति के सदस्यों ने उनको बताया कि इस तालाब का अपना ऐतिहासिक महत्व है। लेकिन समय के साथ हुए बदलावों के बाद हम सभी को इसे सहेजने की जरूरत है। इस मौके पर निगम के संयुक्त आयुक्त -2 विजय यादव ने डीसी को बताया कि तालाब की चारदिवारी व उसके साथ ट्रैक बनाने के लिए टेंडर अलॉट किए जा चुके हैं और जल्द ही वर्क आर्डर जारी किए जाएंगे। कमेटी के सदस्यों ने डीसी से कहा कि यदि तालाब तक के रास्ते को मोटरेबल किया जा सके व तालाब क्षेत्र में अतिक्रमण व काबुली कीकर हटाकर पौधारोपण करवा दिया जाए तो यहां घूमने आने वाले लोगों को काफी सुविधा हो जाएगी। डीसी ने कमेटी के सदस्यों के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक तालाब को पुरानी पहचान दिलाने व इसके कायाकल्प करने की दिशा में जल्द ही सार्थक कदम उठाए जाएंगे।
