दिल्ली-मेरठ, मेरठ मेट्रो के अंडरग्राउंड सेक्शन में एस्कलेटर्स इन्स्टालेशन की प्रक्रिया आरंभ हो गई है और इसकी शुरुआत भैंसाली स्टेशन से हुई है। इस स्टेशन का आधारभूत ढांचा तैयार होने के साथ ही स्टेशन के कॉनकोर्स लेवल से प्लेटफॉर्म लेवल के बीच यात्रियों के सुविधाजनक आवागमन हेतु 2 एस्कलेटर्स इंस्टाल कर दिए गए हैं। स्टेशन के कॉनकोर्स लेवल की स्लैब कास्टिंग पूर्ण होने के साथ ही प्लेटफॉर्म लेवल की स्लैब कास्टिंग भी लगभग पूर्ण हो गई है। मेरठ के अन्य दो भूमिगत स्टेशनों बेगमपुल और मेरठ सेंट्रल में एस्कलेटर्स इन्स्टालेशन की प्रक्रिया भी जल्द ही आरंभ होगी।
एस्कलेटर्स बिजली से चलने वाली स्वचालित सीढ़ियां होती हैं, जो वर्तमान में मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए एनसीआरटीसी द्वारा लगाए जाने वाले एस्कलेटर अत्याधुनिक, अप-टू-डेट तकनीक के साथ, ऊर्जा की बचत करने वाले होंगे और यात्रियों की सुरक्षा एवम सुविधाओं के लिए कई नयी तकनीक से सुज्जजित होंगे। सम्पूर्ण कॉरिडोर के लिए एस्कलेटर्स बनाने के कार्य के लिए एनसीआरटीसी ने शिंडलर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध किया है, जो महाराष्ट्र के पुणे में एस्कलेटर्स बना रही है।
एस्कलेटर्स में होंगी कुछ प्रमुख विशेषताएं
- एस्कलेटर के साइड के पैनल और स्टेप (सीढ़ी) के बीच में साड़ी जैसे ढीले कपड़ों के उलझने की संभावना को कम करने के लिए स्कर्ट गार्ड का प्रयोग।
- एस्कलेटर पर यात्रा करते समय यात्रियों की उंगलियों की सुरक्षा के लिए एस्कलेटर के हैंडरेल पर फिंगर गार्ड लगा होगा।
- एस्कलेटर के असामान्य संचालन पर यात्रियों को एस्कलेटर से गिरने से बचाने के लिए कई स्वचालित सुरक्षा उपकरण होंगे, जिनमें एंटी-रिवर्सल डिवाइस, ड्राइव चेन ब्रोकन डिवाइस, हैंडरेल ब्रोकन डिवाइस, एस्कलेटर ओवर स्पीड डिवाइस, स्टेप सैग / स्टेप ब्रोकन डिवाइस, स्टेप अप-थ्रस्ट डिवाइस, स्टेप मिसिंग डिवाइस, हैंडरेल मॉनिटरिंग डिवाइस आदि।
- एस्कलेटर पर मजबूत पकड़ के लिए “V” प्रकार के हैंडरेल होंगे।
- प्रत्येक एस्कलेटर पर आसानी से बोर्डिंग और डीबोर्डिंग करने के लिए पीली लाइन और पीली लाइट के साथ चार समतल स्टेप होंगे।
- स्टेशन के अंदर पेड एरिया में लगाए गए एस्कलेटर के साइड में शीशे लगे होंगे, जबकि नॉन पेड एरिया में यह स्टेनलेस स्टील का होगा।
- एस्कलेटर पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए एस्कलेटर के ऊपर और नीचे अतिरिक्त इमर्जेंसी स्टॉप स्विच होंगे, जिन्हें ज़रूरत पड़ने पर प्रयोग करके एस्कलेटर को रोका जा सकेगा।
भैंसाली मेट्रो स्टेशन लगभग 260 मीटर लंबा है, लेकिन यात्रियों के प्रयोग के लिए प्लेटफॉर्म की लंबाई 75 मीटर होगी, जबकि स्टेशन के बाकी हिस्से में प्लेटफॉर्म एरिया के दोनों ओर कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म दोनों लेवल्स पर स्टेशन के ऑपरेशंस के लिए आवश्यक तकनीकी रूम्स जिनमें ऑग्जिलियरी सब स्टेशन (एएसएस), स्टेशन कंट्रोल रूम (एससीआर), इलैक्ट्रिकल कंट्रोल रूम (ईसीआर), टेलिकॉम इक्युप्मेंट रूम (टीईआर), सिग्नलिंग इक्युप्मेंट रूम (एसईआर) बनाए जा रहे हैं और इन रूम्स के आगे बचे बाकी हिस्से में ट्रेनों द्वारा पटरियां बदलने के लिए क्रॉस ओवर होंगे। स्टेशन के दोनों ओर समानान्तर टनल हैं। भैंसाली मेट्रो स्टेशन में मेट्रो ट्रैक के साथ ही आरआरटीएस ट्रेनों के लिए भी निर्धारित अप एंड डाउन ट्रैक बनाए जाएंगे। टनल और प्लेटफॉर्म के बीच मेट्रो और आरआरटीएस ट्रेनों के परिचालन हेतु क्रॉस ओवर बनाए जाएंगे। भैंसाली मेट्रो स्टेशन की चौड़ाई लगभग 30 मीटर और गहराई करीब 17 मीटर है।
स्टेशन के कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म लेवल के कार्य के साथ ही स्टेशन में फिनिशिंग का कार्य आरंभ हो गया है। एयर कंडिशनिंग आदि के लिए एयर डक्ट इन्स्टालेशन के साथ-साथ ओटीई (ओवरहेड ट्रैक्शन एग्ज़ॉस्ट) डक्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यात्रियों से संबन्धित सुविधाएं जैसे शौचालय आदि का निर्माण कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैं। जल्द ही यहां ट्रैक बिछाने और ओएचई इन्स्टालेशन की गतिविधियां भी आरंभ की जाएंगी।