एडीसी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण ) अधिनियम 1989 के तहत दर्ज 14 केसों की समीक्षा की
गुरूग्राम, 26 सितम्बर। जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी कमेटी की त्रैमासिक बैठक एडीसी हितेश कुमार मीणा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में अनुसूचित जाति व जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत दर्ज 14 केसों में जिला कल्याण अधिकारी द्वारा पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बारे समीक्षा की गई। लघु सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक में जिला कल्याण विभाग के अधिकारी व पुलिस विभाग सहित अन्य गैर – सरकारी सदस्य उपस्थित रहे।
एक्ट का उद्देश्य पीड़ित वर्ग को ना केवल कानूनी सहायता
बैठक में जिला कल्याण अधिकारी जगदेव से विस्तृत जानकारी लेने उपरान्त एडीसी हितेश कुमार मीणा ने कहा कि इस एक्ट का उद्देश्य पीड़ित वर्ग को ना केवल कानूनी सहायता उपलब्ध करवाना है बल्कि उनकी आर्थिक मदद करना है। उन्होंने बैठक में उपस्थित पुलिस के अधिकारियों से कहा कि इस एक्ट की प्रभावी ढंग से पालना के लिए जरूरी है कि थाने में मामला दर्ज होते ही इसकी सूचना जल्द से जल्द संबंधित विभाग तक पहुंच जाए ताकि पीड़ित व्यक्ति की नियमानुसार सहायता की जा सके।
सामाजिक जीवन में उसी मान सम्मान के साथ पुनः वापिसी
एडीसी ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार कानूनी व आर्थिक मदद करती है लेकिन सामाजिक जीवन में उसी मान सम्मान के साथ पुनः वापिसी के लिए हम सभी को आगे आकर पीड़ित के आत्मविश्वास को बढ़ावा देना होगा। एडीसी ने कहा कि यह जरूरी नही है कि जब आप पीड़ित हो तभी विरोध दर्ज करें, यदि आपके सामने कुछ गलत हो रहा है तो भी आप अपना विरोध दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में सभी को बराबरी का हक़ दिया गया है। ऐसे में हम सभी की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि हम हमारी आने वाली जेनरेशन को समाज में जाति भेदभाव जैसी कुप्रथा से दूर रखें।।
बैठक में जिला कल्याण अधिकारी जगदेव ने बताया कि इस स्कीम के तहत अनुसूचित जाति के पीड़ित व्यक्तियों को उनकी क्षतिपूर्ति के लिए कल्याण विभाग द्वारा 85 हजार से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक आर्थिक सहायता के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।