विपक्ष के हाथों में जाकर सभी के आंदोलन हुए फेल
गुरुग्राम 28 अक्टूबर। हरियाणा प्रदेश की खट्टर सरकार के नव वर्ष के शासनकाल के दौरान प्रदेश भर में जितने भी आंदोलन हुए तकरीबन आंदोलन ने दम तोड़ दिया चाहे किसानों का हो या कर्मचारी,व्यापारी का सड़कों पर आंदोलन हुआ हो मगर सरकार की कठोरता के चलते सभी आंदोलन फेल हो गए सभी आंदोलनों ने दम तोड़ दिया। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने प्रदेश में किसी भी आंदोलन को सक्सेस नहीं होने दिया और अभी भी विभिन्न विभागों के कर्मचारी पिछले दो महीना से सड़कों पर हाय-हाय कर रहे हैं लेकिन उनका भी आंदोलन सक्सेस होता दिखाई नहीं दे रहा क्योंकि सरकार भली-भांति जानती है कि आंदोलन करता कर्मचारी हो किस हो तकरीबन विपक्ष के हाथों में जाकर आंदोलन के माध्यम से अपनी मांग जबरदस्ती मंगवाने पर सरकार को मजबूर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
दक्षिणी हरियाणा में किसने के आंदोलन 1 वर्ष तक चले लेकिन सफल नहीं हो पाए
दक्षिणी हरियाणा की बात की जाए किसानों का आंदोलन 1 वर्ष तक चला सड़कों पर किसान महापंचायत करते रहे गिरफ्तारियां हुई मुकदमे दर्ज हुए मगर हरियाणा की खट्टर सरकार ने किसानों को यह बता दिया कि वह दबाव में नहीं आएंगे चाहे कितने भी सड़कों पर आंदोलन क्यों न करने किसानों के आंदोलन को समर्थन हरियाणा की कांग्रेस पार्टी आम आदमी पार्टी के अलावा विभिन्न राजनीतिक दल समर्थन कर रहे थे फिर भी किसानों का आंदोलन फेल हुआ सक्सेस नहीं हो पाया।
नगर निगम के पुराने ठेकेदारों के इशारे पर कच्चे कर्मचारी पिछले 2 महीने से सड़कों पर
गुरुग्राम नगर निगम के कच्चे कर्मचारी पिछले दो माह से सड़कों पर हाय-हाय कर रहे हैं सरकार पर दबाव बना रहे हैं उनको पक्का किया जाए उनको भी कांग्रेस पार्टी आम आदमी पार्टी के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का समर्थन है सरकार को भली-भांति जानकारी है की राजनीतिक दलों के नेताओं के इशारे पर गुरुग्राम नगर निगम के कच्चे कर्मचारी धरने पर बैठे हुए सूत्रों के अनुसार यह भी जानकारी मिली है की जिन पूराने ठेकेदारों को नगर निगम द्वारा ब्लैक लिस्ट किया गया है उनका भी कच्चे कर्मचारियों को धरने पर बैठने का इशारा है लेकिन नगर निगम कर्मचारियों का भी आंदोलन सक्सेस होता दिखाई नहीं दे रहा दम तोड़ता जा रहा है कुछ कर्मचारी धीरे-धीरे अन्य ठेकेदारों के पास काम पर लौटने लगे हैं और जो इन कर्मचारियों को समर्थन दे रहे हैं अब वह भी धीरे-धीरे पीछे खिसकने लगे हैं अब देखना यह है कि कर्मचारी कितने दिन तक और हड़ताल पर बैठेंगे।