Haryana Assembly Elections: दुष्यंत चौटाला के जुडने से बीजेपी को क्या होगा फायदा ?
क्या दुष्यंत जोड़ पाएंगे जाट वोट !

लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले ही बीजेपी और JJP का गठबंधन टुटा था। लोकसभा चुनाव में JJP के प्रत्याशियों को मुँह की कहानी पड़ी। आपको बता दे की कुछ ऐसा ही हाल दुष्यंत की पार्टी का राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी हुआ था। वहीं सूत्रों के अनुसार, खबर है की दुष्यंत के विधायकों ने भी उनसे अब दुरी बनानी शुरू कर दी है। साथ ही राजीनीतिक गलियारों से ये भी खबर है की दुष्यंत के विधायक उनसे खुश नहीं है। वहीं दुष्यंत एंड JJP कंपनी की राजीनीति अब लगभग खात्मे की ओर है। दुष्यंत और खट्टर की हुई राजीनीतिक शादी कराने में भाजपा से हिमाचल के बड़े नेता और हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद अनुराग ठाकुर के बीच मध्यस्तता हुई थी। वही हरियाणा प्रदेश की जनता ने साढ़े 4 साल तक पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शासन किया। दोनों के नेतृत्व में हरियाणा के कई विभागों में कई घोटाले हुए। जहाँ एक तरफ जनता घरों में बंद थी, समशान घाटों में जहाँ दाह संस्कार करने के लिए जगह नहीं बची थी। उस समय इनके राज्य में शराब घोटाला हो रहा था। इतना ही नहीं, कहीं चावल घोटाले की गूंज तो कही आबकारी विभाग पर सवाल उठाये जा रहे थे। वहीं दूसरी ओर नगर निगम गुरुग्राम और फरीदाबाद से करोड़ो के घोटाले की बू प्रदेश ही नहीं विदेशों में भी मशहूर हो रही थी। जिससे प्रदेश की जनता में पूर्व उपमुख्यनत्री दुष्यंत चौटाला और तब के तत्कालीन हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की छवि लगतार गिर रही थी। वही भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने साढ़े चार साल बाद दोनों की हुई राजनैतिक शादियां तुड़वा दी। एक ही रात में दोनों दिग्गज अलग-अलग हो गये। वहीं राजनीति में एक सही कहावत भी है की यहाँ कोई किसी का नहीं होता।
दूसरी तरफ जैसे ही दोनों नेताओ के बिच अलग होने की बात हुई वैसे ही गठबंधन टूटने से पहले कुछ नेता अंदरूनी रूप से भाजपा का समर्थन करने लगे। क्योंकि नेता हो या संत्री कुर्सी सभी को प्यारी है। वहीं JJP के कई नेता अपनी पार्टी को छोड़ भाग खड़े हुए।

क्या दुष्यंत जोड़ पाएंगे जाट वोट !
जबकि वही हरियाणा में भाजपा की गिरती हुई छवि को देखते हुए भाजपा से स्वयं पीएम मोदी ने संज्ञान लेते हुए तब के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बदल उस समय के कुरुक्षेत्र से सांसद नायब सिंह सैनी को पहले प्रदेश अध्यक्ष पद और फिर बाद में मुख्यंमंत्री पद भी सौंप दिया। जिससे भाजपा की झोली में OBC वोट मिल सके। लेकिन मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी लोकसभा चुनाव में कोई चमत्कार नहीं दिखा पाए. नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में भाजपा की 5 सीट कांग्रेस की झोली में चली गई। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 10 की 10 सीटों पर बाजी मारी थी। लेकिन 2024 लोकसभा चुनावो में बीजेपी को हरियाणा से भी बड़ा झटका लगा।
लेकिन अब दो महीने बाद हरियाणा प्रदेश में विधानसभा की घोषणा होने जा रही है। भाजपा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हरियाणा विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया हुआ है साथ ही त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देव को हरियाणा का भाजपा प्रभारी बनाया हुआ है। आपको ये भी बता दे की बिप्लब देव लोकसभा चुनावों में भी भाजपा प्रभारी रहते हुए कोई खास चमत्कार नहीं दिखा पाए. साथ ही साथ भाजपा नेताओ के बीच आपसी खींचातानी को की समाप्त नहीं कर पाए। नतीजन भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनावों में 5 सीट गवानी पड़ी।

2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का नारा था अबकी बार 72 पार। लेकिन तब बीजेपी की पूरी पारी 41 पर ही सिमट गयी थी। 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में जाट समाज ने बीजेपी का पुरजोर साथ नहीं दिया था। लेकिन अबकी बार भी जाट वोटबैंक भाजपा को बड़ा खतरा नजर आ रहा है।
जिसका अलार्म भाजपा के लिए 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में जाट समाज ने बजा दिया था। 2024 में हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोकि हुई है। सूत्रों के हवाले से खबर है की तक़रीबन 95 % जाट वोट बैंक कांग्रेस को समर्थन देने वाली है। वहीं भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान जाट आंदोलन और करोना काल में हुआ। इस नुकसान के पीछे एक बड़ा कारण ये भी हो सकता है की हरियाणा में भाजपा के खेमे में कोई बड़ा जाट चेहरा नहीं दिख रहा है। ना मुख्यमंत्री,ना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नाही हरियाणा चुनाव प्रभारी जाट का है।