Gurugram News : सोहना विधानसभा से विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे हरियाणा के पूर्व सूचना आयुक्त नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि शिव की नगरी सोहना जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार रही है। टैक्स देने वाली जनता को उसी हिसाब से सुविधाएं भी दी जानी चाहिए। यह बात उन्होंने क्षेत्र में जनसम्पर्क अभियान के दौरान कही।
लोगों ने मानसून की शुरुआत में ही जलभराव से हुई परेशानी उनके साथ साझा की। जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी लोगों ने सवाल उठाए। नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि बरसात से जलभराव होने पर जनप्रतिनिधियों को यह बताना चाहिए कि उनके कार्यकाल में आखिर किस तरह का विकास क्षेत्र का हुआ है। ना तो नाले साफ है और ना ही नालियां। सीवरेज ओवरफ्लो हो रहे हैं। जो जनप्रतिनिधि कदम-कदम पर विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, उनके दावों की जरा सी बरसात में ही पोल खुल जाती है। बरसात में शहरों, कस्बों में जलभराव हो रहा है तो उन्होंने किस तरह का विकास अपने क्षेत्र में कराया है।
नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि जनता के बीच वे राजनीति नहीं सेवा करने की भावना से आए हैं। राजनीति सेवा का एक माध्यम है, जो आज के नेताओं में कम नजर आती है। एक जनप्रतिनिधि से जनता को बहुत सी उम्मीदें होती हैं। उन पर खरा उतरना उसका दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि सेवा का अवसर जरूर दें, ताकि राजनीति में राज मिलने के बाद जनता से दूर हो जाने की प्रथा, भावना को बदल सकें।
नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि विकास के दावे करना और जमीनी स्तर पर विकास होने में बहुत अंतर है। जिस तरह से हर बार बरसात में हालात खराब होते हैं। जिस प्रकार से शहर, कस्बे तालाब बन जाते हैं और पानी की निकासी का कोई स्थायी प्रबंध नहीं होता। लोग परेशानियों से जूझते रहते हैं। बरसात से पहले नाले-नालियों की सफाई के बड़े दावे किए जाते हैं, वे बरसात के समय हवा हो जाते हैं। उन दावों में दम नजर नहीं आता। क्योंकि बरसात का पानी सडक़ों, गलियों में भरा रहता है। सप्ताह भर तक पानी वहां सड़ता रहता है, लेकिन कोई कुछ नहीं करता।
उन्होंने कहा कि पिछले कई साल से वे देखते आ रहे हैं कि जलभराव नहीं होने के देने के सरकार खूब बातें कहती है, लेकिन जब बरसात आती है तो हकीकत कुछ और ही होती है। सोहना क्षेत्र में जलभराव से प्रभावित लोगों की समस्या सुनने के बाद नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि आम आदमी बरसात के आने से भी प्रभावित होता है और ना आने से भी। बरसात का पानी दुकानों, मकानों में ना भरे, इसके प्रबंध होने चाहिए।