
1 अगस्त – उत्तर भारत में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं से तबाही मच गई है। विभिन्न राज्यों में 20 से अधिक लोगों की जान चली गई, कई घर बह गए, और सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल राहत कार्यों में जुटे हैं और स्थिति पर काबू पाने के प्रयास कर रहे हैं।
उत्तराखंड: केदारनाथ यात्रा स्थगित, कई लोग लापता
उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। राज्य में पिछले 24 घंटों में बारिश से संबंधित घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो गई। देहरादून में चार, हरिद्वार में छह, टिहरी में तीन, और चमोली में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भीमबली में बड़े पैमाने पर मार्ग बह गया, जिससे यात्रा को स्थगित करना पड़ा। लगभग 1500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें से 425 यात्रियों को हेलिकॉप्टर के माध्यम से निकाला गया, जबकि बाकी को वैकल्पिक मार्गों से बाहर निकाला गया।
हिमाचल प्रदेश: बादल फटने की घटनाएं
हिमाचल प्रदेश भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूता नहीं रहा। राज्य में बादल फटने की कई घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई है। मंडी में तीन और शिमला में दो लोगों की जान गई, जबकि करीब 50 लोग अभी भी लापता हैं। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
राजस्थान: जयपुर में बारिश से तीन की मौत
राजस्थान के जयपुर में भी भारी बारिश के कारण एक परिवार के तीन सदस्यों की डूबकर मौत हो गई। विश्वकर्मा इलाके में घर के बेसमेंट में पानी घुसने से यह हादसा हुआ। इसके अलावा, बगरू थाना क्षेत्र में एक किशोर पीयूष आचार्य (15) नाले में बह गया।
राहत और बचाव कार्य
सरकार और बचाव एजेंसियां सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावित लोगों के लिए अस्थाई शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
यह प्राकृतिक आपदा उत्तर भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है, और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित एजेंसियां सतर्क हैं। इस संकट की घड़ी में लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।