

1 अगस्त, नई दिल्ली – बिहार में 65 फीसद आरक्षण की मांग को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसदों ने गुरुवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि इस आरक्षण को भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी की सांसद मीसा भारती ने किया, जिन्होंने कहा कि इससे दलितों, आदिवासियों, और अतिपिछड़ों को उनका अधिकार मिलेगा।
पिछले वर्ष बिहार में की गई जाति गणना रिपोर्ट के बाद तत्कालीन ‘इंडिया’ गठबंधन सरकार (राजद-जद(यू), कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन) ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को 65 फीसद तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही इसे भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई थी। हालांकि, बाद में नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) ने ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा बन गई।
हाल ही में पटना हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार के इस निर्णय पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद राजद सांसदों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह निर्णय आरक्षण विरोधी है। प्रदर्शनकारियों में राजद सांसद अभय कुशवाहा, मीसा भारती, सुरेंद्र यादव, फैयाज अहमद, प्रेमचंद गुप्ता, मनोज झा, सुधाकर सिंह, और संजय यादव शामिल थे।
संसद भवन के प्रवेश द्वार पर राजद सांसदों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और नारे लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 65 फीसद आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल न करने पर नाराजगी जताई। सांसदों ने कहा कि बिहार में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बढ़ाई गई आरक्षण सीमा को लागू न करना दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों और आदिवासियों के अधिकारों का हनन है।
यह मुद्दा बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है, जहां एक ओर राज्य सरकार ने आरक्षण बढ़ाने की कोशिश की, वहीं अदालत और केंद्र सरकार ने इसे रोक दिया। राजद सांसदों का यह विरोध प्रदर्शन बताता है कि यह मुद्दा अभी भी गर्म है और आने वाले दिनों में इसे लेकर और भी राजनीतिक गतिविधियाँ हो सकती हैं
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