
दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों में इस साल डेंगू के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में डेंगू के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि डेंगू एक गंभीर वायरल बीमारी है जो मच्छरों के जरिए फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है।
केरल और तमिलनाडु में डेंगू का प्रभाव
केरल और तमिलनाडु में डेंगू के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। इन राज्यों में मानसून के कारण पानी जमा होने की स्थिति में मच्छरों का प्रजनन बढ़ गया है, जिससे डेंगू फैलाने वाले एडीस मच्छरों की संख्या में इजाफा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा है। डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने और मच्छरों से बचाव के उपाय करने की सलाह दी है।
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी बढ़ते मामले
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी डेंगू के मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में डेंगू के फैलने की मुख्य वजह साफ-सफाई की कमी और मच्छरों का बढ़ता प्रजनन है। इन राज्यों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट पर रखा है, और लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए सावधान रहने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की चेतावनी और अडवाइजरी
डेंगू के मामलों में तेजी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को आवश्यक कदम उठाने और डेंगू की रोकथाम के लिए जारी अडवाइजरी का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। अडवाइजरी में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने, जलभराव रोकने, और लोगों को डेंगू के लक्षणों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, डेंगू के मरीजों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने और डेंगू से बचाव के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है।
डेंगू से बचाव के उपाय
डेंगू से बचने के लिए लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए पानी जमा न होने दें और कूलर, फूलदान आदि में पानी को नियमित रूप से बदलें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का उपयोग करें। अगर डेंगू के लक्षण जैसे बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
**निष्कर्ष**
दक्षिण और पश्चिम के राज्यों में डेंगू के मामलों में आई तेजी ने स्वास्थ्य सेवाओं के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अडवाइजरी का पालन करते हुए और जन जागरूकता बढ़ाकर ही डेंगू के फैलाव को रोका जा सकता है। लोगों को सतर्क रहने और मच्छरों से बचाव के उपायों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि इस बीमारी से बचा जा सके और इसे नियंत्रित किया जा सके।