
नई दिल्ली, 11 August – रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया है, जहां यूक्रेनी सेना ने सीधे रूस की सीमा में प्रवेश कर सैन्य कार्रवाई की है। यह घटना दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार हुई है जब किसी विदेशी सेना ने रूसी क्षेत्र में आक्रमण किया हो। इस कदम से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है।
यूक्रेनी सेना का साहसिक कदम
यूक्रेनी सेना ने रणनीतिक योजना के तहत रूस के कुर्स्क क्षेत्र में प्रवेश किया है। यह क्षेत्र रूस के पश्चिमी भाग में स्थित है और यूक्रेन की सीमा से सटा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने यहां महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे रूस की रक्षा प्रणाली को चुनौती मिली है।
कुर्स्क निवासियों का पलायन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, राष्ट्रपति पुतिन ने कुर्स्क क्षेत्र से 76,000 से अधिक निवासियों को तत्काल क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया है। स्थानीय प्रशासन ने तेजी से राहत और बचाव कार्यों की व्यवस्था की है, ताकि नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। कुर्स्क के निवासियों के लिए अस्थायी शिविरों की स्थापना की गई है, जहां उन्हें आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। कई देशों ने इस पर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से, रूस ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। लेकिन यूक्रेनी सेना का यह कदम रूस की रक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि रूस इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा क्या मोड़ लेती है।
निष्कर्ष
रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। यूक्रेनी सेना का रूस में प्रवेश और कुर्स्क के निवासियों का पलायन इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब दोनों देशों पर टिकी हैं, और यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष संयम से काम लेंगे और कूटनीतिक तरीकों से समाधान खोजेंगे।