NGT के आदेश पर SC की रोक, गणपति विसर्जन के लिए 30 से ज्यादा लोगों को जाने पर लगाया था प्रतिबंधित

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें गणपति विसर्जन के दौरान 30 से अधिक लोगों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया गया था। NGT ने पर्यावरण संरक्षण और नदियों के प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा कि धार्मिक त्योहारों के दौरान कुछ परंपराओं और मान्यताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।
NGT ने हाल ही में अपने आदेश में गणपति विसर्जन के दौरान जल निकायों में प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से 30 से अधिक लोगों के समूह के साथ विसर्जन कार्यक्रमों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके अलावा, नदियों और तालाबों में मूर्तियों के विसर्जन पर भी कड़े निर्देश जारी किए गए थे। NGT का मानना था कि बड़े समूहों में विसर्जन से जल प्रदूषण और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने NGT के इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गणपति विसर्जन के दौरान 30 से अधिक लोगों के शामिल होने पर पूरी तरह से रोक लगाना अनुचित हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन जरूरी है और लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि जल प्रदूषण न हो।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आदेशों से धार्मिक स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन किया जाए और नदियों में प्रदूषण कम करने के लिए वैकल्पिक समाधान ढूंढे जाएं।
यह आदेश उन लाखों भक्तों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर साल गणपति विसर्जन समारोह में शामिल होते हैं। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि यह रोक अस्थायी है और इस मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विसर्जन के लिए उचित व्यवस्था करें, ताकि धार्मिक भावनाएं और पर्यावरण संरक्षण, दोनों का ध्यान रखा जा सके।