
हालिया गाजा युद्ध में अब तक 41,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, और इसके साथ ही भारी तबाही भी देखने को मिली है। इसके बावजूद हमास की डिफेंस लाइन अब तक टूटने में विफल रही है, जिससे इस संघर्ष की जटिलता और गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अब युद्ध को अंजाम तक पहुंचाने की चुनौती और भी बड़ी हो गई है।
इजरायल की सेना द्वारा किए जा रहे निरंतर हमलों और गाज़ा में हमास के ठिकानों को निशाना बनाने के बावजूद, हमास ने अपनी मजबूत रक्षा रणनीति बनाए रखी है। हमास ने अपनी सुरंगों, भूमिगत ठिकानों, और सामरिक ठिकानों के माध्यम से इजरायली सेना को कड़ी चुनौती दी है। इसके अलावा, हमास की रॉकेट क्षमताएं भी इजरायल के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिससे संघर्ष को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों में अड़चनें आ रही हैं।
नेतन्याहू की सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस युद्ध को किस प्रकार समाप्त किया जाए, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बावजूद हमास अब तक पूरी तरह से कमजोर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं ने इजरायल पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाया है, लेकिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता हमास के ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट करना और गाजा से आतंकी खतरों को समाप्त करना है।
हालांकि, युद्ध को इस स्तर तक खींचने से नेतन्याहू की सरकार की आलोचना भी हो रही है, खासकर उन नागरिकों के बीच जो इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। जनता के बीच बढ़ती चिंता और युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट ने नेतन्याहू के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन उनकी सरकार फिलहाल अपने उद्देश्यों पर अडिग नजर आ रही है।
इस पूरे परिदृश्य में, इजरायल और हमास के बीच यह संघर्ष किस मोड़ पर पहुंचेगा और नेतन्याहू इसे कैसे संभालेंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।