
हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी ने चुनावी मशीनरी, विशेषकर ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, चुनावी नतीजों की गहराई से जांच करने पर यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस की हार का असली कारण पार्टी के आंतरिक विवाद, बागी उम्मीदवारों का मैदान में उतरना और टिकट आवंटन में हुई गलतियां हैं। कई सीटों पर जहां कांग्रेस जीत के करीब थी, बागी उम्मीदवारों और गलत टिकट वितरण ने उसे हार की ओर धकेल दिया।
आइए, उन प्रमुख सीटों पर नजर डालते हैं जहां बागियों और गलत चुनावी रणनीतियों के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा:
1) अंबाला कैंट
चित्रा सरवारा, जिनके पिता को कांग्रेस ने अंबाला सिटी से टिकट दिया था, खुद भी टिकट चाह रही थीं। लेकिन उन्हें टिकट न मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। चित्रा ने 52,581 वोट प्राप्त किए और अनिल विज को कड़ी टक्कर दी, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सिर्फ 14,469 वोट हासिल कर पाया। चित्रा की निर्दलीय उम्मीदवारी ने कांग्रेस की संभावनाओं को कमजोर किया और पार्टी यहां हार गई।
2) बाढड़ा
सोमबीर घौडेला ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 26,730 वोट लेकर 7,585 मतों से कांग्रेस उम्मीदवार को हराने में बड़ी भूमिका निभाई। यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई, क्योंकि बागी उम्मीदवार ने पार्टी की वोट बैंक को बांट दिया।
3) बहादुरगढ़
यहां कांग्रेस ने विधायक राजेंद्र जून पर भरोसा जताया, जबकि उनके भतीजे राजेश जून भी टिकट के दावेदार थे। राजेश जून ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 41,999 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। राजेंद्र जून तीसरे या चौथे स्थान पर चले गए और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा।
4) बल्लभगढ़
पूर्व विधायक शारदा राठौर को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 44,076 वोट हासिल किए। दूसरी ओर, कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 8,674 वोट मिले, जिससे पार्टी की हार सुनिश्चित हो गई।
5) भिवानी
यह सीट कांग्रेस के सहयोगी सीपीआई (एम) के खाते में गई, लेकिन बागी अभिजीत ने 15,810 वोट लेकर पार्टी की हार में भूमिका निभाई। यहां, बागियों और छोटे दलों के कारण कांग्रेस को अपनी पकड़ कमजोर करनी पड़ी।
6) दादरी
दादरी में कांग्रेस का एक बागी उम्मीदवार 3,369 वोट लेकर चुनाव में उतरा, जबकि पार्टी मात्र 1,957 वोटों के अंतर से हार गई। इस सीट पर बागी की मौजूदगी ने कांग्रेस की जीत की संभावना को खत्म कर दिया।
7) गोहाना
कांग्रेस ने पांच बार के विधायक पर भरोसा जताया, लेकिन बागी हर्ष छिक्कारा ने 14,761 वोट लेकर कांग्रेस को 10,429 वोटों से हराने में अहम भूमिका निभाई।
8) पानीपत ग्रामीण
यहां कांग्रेस उम्मीदवार की हार का अंतर 50,212 वोटों का था। इसके बावजूद, विजय जैन ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 43,323 वोट प्राप्त किए, जिससे पार्टी की हार और भी निश्चित हो गई।
9) पूंडरी
बागी सतबीर भाना ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 40,608 वोट लेकर दूसरे स्थान पर कब्जा किया। कांग्रेस तीसरे स्थान पर पहुंच गई और मात्र 2,197 वोटों के अंतर से हार गई।
10) राई
प्रतीक राजकुमार ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 12,262 वोट प्राप्त किए, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार 4,673 वोटों से हार गया। बागियों की भूमिका ने इस सीट पर कांग्रेस के वोटों को बुरी तरह विभाजित किया।
11) तिगांव
पूर्व विधायक ललित नागर को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 56,828 वोट लेकर दूसरे स्थान पर आए। कांग्रेस उम्मीदवार को मात्र 21,656 वोट ही मिले, जिससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ।
12) नरवाना
नरवाना में टिकट न मिलने से नाराज विधारानी इनेलो में शामिल हो गईं और 46,303 वोट हासिल किए। कांग्रेस ने 47,975 वोट प्राप्त किए, लेकिन 11,499 वोटों से हार गई। यहां बागी उम्मीदवारों के कारण कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा।
13) सफीदों
यहां भी बागी उम्मीदवार 20,114 वोट लेकर मैदान में उतरा, जिससे कांग्रेस 4,037 वोटों के अंतर से हार गई।
जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग है
कांग्रेस ने ईवीएम को अपनी हार का कारण बताया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग है। पार्टी के बागियों ने कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाई और कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, पार्टी द्वारा किए गए गलत टिकट आवंटन और आंतरिक कलह भी हार की वजह बने। इन चुनावों में कांग्रेस की विफलता के पीछे संगठनात्मक समस्याएं, बागी उम्मीदवारों और गलत चुनावी रणनीतियों का बड़ा हाथ है, जिन पर अगर समय रहते ध्यान दिया जाता, तो पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी।