
देशभर में महंगाई
महिलाएं अब बाजारों में समान खरीदने के लिए संघर्ष कर रही हैं
महिलाओं के किचन बजट को गंभीर रूप से प्रभावित
नई दिल्ली। देशभर में महंगाई के बढ़ते स्तर ने महिलाओं के किचन बजट को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे घरेलू खर्चों को संभालना मुश्किल हो रहा है। वर्तमान में टमाटर की कीमत 150 रुपये प्रति किलो, आलू 40 रुपये प्रति किलो, और प्याज 80 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं
महिलाएं अब बाजारों में समान खरीदने के लिए संघर्ष कर रही हैं, क्योंकि अधिकतर बजट किचन की आवश्यकताओं पर ही खर्च हो रहा है। इस बढ़ती महंगाई के कारण अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बजट नहीं बच रहा है।
सरकार की महंगाई पर नाकामी
केंद्र सरकार महंगाई कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हो रही है। सरसों का तेल अब 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, और दालों की कीमतें भी बेहद ऊंची हैं—चना दाल 200 रुपये प्रति किलो और मूंग दाल 150 रुपये प्रति किलो। इस स्थिति ने घरेलू महिलाओं के लिए आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
दिल्ली एनसीआर की एक घरेलू महिला रजनी ने कहा, “सब्जियों और दालों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि हम अपने लिए भी आवश्यक सामान नहीं खरीद पा रहे हैं। घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।”
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम
महंगाई का असर केवल खाद्य पदार्थों पर नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल के दामों पर भी पड़ रहा है। बढ़ती ईंधन की कीमतों ने मोटरसाइकिल चालकों और गाड़ी मालिकों को भी परेशान कर दिया है। इससे दैनिक जीवन की गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है,
महंगाई के इस दौर में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, जबकि अमीर वर्ग पर इसका असर कम है। भाजपा सरकार के तहत बढ़ती महंगाई ने समाज के निम्न वर्ग को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है। सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर ध्यान देकर आम जनता को राहत प्रदान करे, ताकि महिलाएं और उनके परिवार जीवन यापन में थोड़ी राहत महसूस कर सकें।