
संगीत हर किसी को जोड़ने की ताकत रखता है, महाभारत के अर्जुन
पुरानी फिल्मों के गाने: आज भी दिलों में बसी धुनें
मुंबई, 16 अक्टूबर – भारतीय संगीत की एक अनोखी विशेषता यह है कि पुरानी फिल्मों के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। जहां एक ओर युवा पीढ़ी नई धुनों पर झूमती है, वहीं देश की आधी से अधिक जनसंख्या पुरानी गानों को सुनने में रुचि रखती है। गाड़ियों में, पार्टियों में और खास मौकों पर, ये पुरानी धुनें गुनगुनाते हुए अक्सर सुनाई देती हैं।
पुरानी गानों का महत्व
पुराने गानों का महत्व केवल उनकी लय और संगीत में नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं और यादों में भी है। ये गाने न केवल सुनने वालों को अतीत की याद दिलाते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। महाभारत में अर्जुन का किरदार निभाने वाले फिरोज खान जैसे कलाकार आज भी मंचों पर पुराने गानों को गाते हैं। उनका संगीत हर धर्म और समुदाय में समान रूप से पसंद किया जाता है, जो उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाता है।
सांस्कृतिक समरसता और एकता
फिरोज खान का कहना है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और सभी समुदायों के बीच समानता का मूल्य रखते हैं। महाभारत में भगवान श्री कृष्ण का धर्म की रक्षा करना आज के समय में भी प्रासंगिक है। यह धार्मिक समरसता ही उन्हें देशभर में आदर दिलाती है और यह दिखाती है कि संगीत हर किसी को जोड़ने की ताकत रखता है।
सिनेमा का बदलता स्वरूप
हालांकि, पुरानी फिल्मों की कहानियाँ पारिवारिक मूल्यों और धर्म पर आधारित होती थीं, लेकिन आज की फिल्मों में मनोरंजन का एक अलग स्वरूप देखने को मिलता है। युवा आजकल नई फिल्मों और उनके विचारों की ओर आकर्षित होते हैं, जबकि सीनियर सिटीजन पारिवारिक और धार्मिक फिल्मों को पसंद करते हैं। महिलाएं अक्सर परिवारिक मुद्दों पर आधारित फिल्में देखने में रुचि रखती हैं।
पुरानी फिल्मों के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं।
पुरानी फिल्मों के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं। ये गाने सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जबकि आज का युवा नई धुनों की ओर आकर्षित है, पुरानी संगीत की धुनें अपनी एक अलग पहचान बनाए रखती हैं।
महिलाएं तो परिवार वाली फिल्मों को देखने में अधिक दिलचस्पी दिखाती है लेकिन युवा नई फिल्म और आज के युग की फिल्म को लेकर अधिक उत्साहित रहता है।