
इतिहास में दो बार ऐसा हुआ है जब एक साथ पिता-पुत्र ने भारत सरकार और हरियाणा सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
हरियाणा की राजनीतिक इतिहास में दो बार ऐसा हुआ है जब एक साथ पिता-पुत्र ने भारत सरकार और हरियाणा सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। ये घटनाएं न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही हैं, बल्कि इससे राज्य की राजनीति में परिवारवाद की परंपरा को भी बल मिला है।
चौधरी बंसीलाल ने राजीव गांधी की सरकार में रेल मंत्री का पद संभाला।
बेटे, चौधरी सुरेंदर सिंह, हरियाणा की भजनलाल सरकार में कृषि मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
साल 1984-85 में, चौधरी बंसीलाल ने राजीव गांधी की सरकार में रेल मंत्री का पद संभाला। इस दौरान उनके बेटे, चौधरी सुरेंदर सिंह, हरियाणा की भजनलाल सरकार में कृषि मंत्री के रूप में कार्यरत थे। यह समय हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जहां एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग स्तरों पर सत्ता में थे।
दूसरी घटना: 1989
ताऊ देवीलाल ने वीपी सिंह की सरकार में उप प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया।
दूसरी बार यह स्थिति 1989 में देखने को मिली। ताऊ देवीलाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद छोड़ा और अपने बेटे, ओम प्रकाश चौटाला, को मुख्यमंत्री बना दिया। ताऊ देवीलाल ने इस दौरान वीपी सिंह की सरकार में उप प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया। इस समय भी पिता-पुत्र की जोड़ी ने राजनीतिक दृश्य पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी यह चर्चा का विषय है।
हरियाणा की राजनीति में पिता-पुत्र के इस संयुक्त शासन ने न केवल राजनीतिक स्थिरता प्रदान की, बल्कि परिवारवाद की अवधारणा को भी मजबूत किया। इन घटनाओं ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी यह चर्चा का विषय है।