
पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की शानदार प्रदर्शनी की।
गुरुग्राम।: राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजन हर साल देशभर के मेलों में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। इस बार भी गुरुग्राम सरस मेले में हिस्सा लेने आए राजस्थान के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की शानदार प्रदर्शनी की। इन स्टॉलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, जो राजस्थान के व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए बेताब हैं।
राजस्थानी व्यंजनों की विविधता का आनंद
राजस्थानी भोजन का ज़िक्र होते ही सबसे पहले दाल बाटी चूरमा का नाम आता है, जो इस मेले में भी सबसे प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। इसके अलावा, प्याज कचोरी, दाल कचोरी, मूंग की दाल का हलवा, मिर्ची वड़ा, रबड़ी घेवर, रबड़ी जलेबी और राज कचोरी जैसी लोकप्रिय रेसिपीज़ भी लोगों के बीच बेहद पसंद की जा रही हैं।
इनके साथ ही पापड़ी चाट और मिठाइयों में खासतौर पर रसमलाई और जलेबी भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।
स्थानीय प्रतिनिधियों का योगदान
सरस मेले में राजस्थान की स्टॉलों को सजाने और लोगों तक असली राजस्थानी स्वाद पहुंचाने में प्रदीप सिंह राठौर, सुरेंद्र सिंह नरूका, और रिंकू कंवर की टीम ने अहम भूमिका निभाई है। इनकी मेहनत और लगन से लोगों को राजस्थानी व्यंजनों का असली स्वाद मिल रहा है, जो हर उम्र के लोगों को आकर्षित कर रहा है।
राजस्थानी खानपान का बढ़ता क्रेज
राजस्थानी व्यंजन न केवल अपने अद्वितीय स्वाद के लिए जाने जाते हैं, बल्कि इनमें पोषण और परंपराओं का भी समावेश होता है। इस बार मेले में आए लोग इन व्यंजनों का लुत्फ उठाने के साथ ही अपने परिवार और दोस्तों के लिए भी खरीदारी कर रहे हैं। चाहे चूरमा की मिठास हो या बाटी का करारापन, हर चीज़ में राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर की झलक मिलती है।
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