
1200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने की तैयारी
लखनऊ, 23 अक्टूबर: दिल्ली एनसीआर में जेवर एयरपोर्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 1200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने की तैयारी की जा रही है। यह कदम एयरपोर्ट के आसपास एक बड़े एविएशन हब के विकास के लिए उठाया जा रहा है, जो 2041 तक पूरा किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश को उद्योग और एयरपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश को उद्योग और एयरपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दिल्ली एनसीआर में विकास की गति में तेजी लाने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर को प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
एयरपोर्ट के विशेषताएँ
- छह रनवे: नोएडा एयरपोर्ट को देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने के लिए छह रनवे की आवश्यकता होगी, जिससे यह यात्रियों और मालवाहन के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनेगा।
- बड़े प्रोजेक्ट्स: मास्टर प्लान-2041 में अन्य बड़ी परियोजनाएँ भी शामिल हैं, जो इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।
सरकार की योजना
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दिल्ली एनसीआर में सबसे अधिक विकास पर जोर दिया है। यह योजना न केवल एयरपोर्ट के विकास को सुनिश्चित करेगी, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी बढ़ावा देगी।
यह विस्तार ना केवल यात्री सुविधाओं को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जेवर एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना बहुत महत्वपूर्ण है।
आर्थिक प्रभाव
- नौकरी सृजन: एयरपोर्ट के विस्तार से सीधे तौर पर हजारों नई नौकरियों का सृजन होगा, विशेष रूप से निर्माण, सेवाओं और परिवहन क्षेत्रों में।
- स्थानीय व्यापार का विकास: एयरपोर्ट के आस-पास व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग सेंटर जैसे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन में वृद्धि: बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरणीय चिंताएँ
- भूमि उपयोग और संरक्षण: 1200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पर्यावरण पर प्रभाव डाल सकता है। उचित योजना और कार्यान्वयन से इन प्रभावों को कम किया जा सकता है।
- ध्वनि और वायु प्रदूषण: अधिक उड़ानों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए तकनीकी उपायों की आवश्यकता होगी।
- जलवायु परिवर्तन: एयरपोर्ट के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हो सकती है, इसलिए सतत विकास की रणनीतियाँ अपनाना आवश्यक है।
जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की विकास योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा
जेवर एयरपोर्ट का विस्तार उत्तर प्रदेश की विकास योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह क्षेत्र को एक नया आकार देने के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयर कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देगी।