
रेवाड़ी: हरियाणा में राजनीतिक हलचल के बीच, राजपूत समाज ने राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के लिए अपनी आवाज उठाई है। राज्यसभा सदस्य कृष्ण लाल पंवार के विधायक और हरियाणा सरकार में मंत्री बनने से खाली हुई सीट पर राजपूत समाज ने अपनी दावेदारी पेश की है।
प्रतिनिधित्व की कमी का मुद्दा
हरियाणा राजपूत प्रतिनिधि सभा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ज्ञापन भेजा, जिसमें बताया गया कि हरियाणा के गठन से आज तक राजपूत समाज को राज्यसभा में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। प्रदेश की लगभग 8% जनसंख्या वाले इस समाज के विधायक, विभिन्न कार्यकालों में 18 विधानसभा क्षेत्रों से निर्वाचित होते आए हैं।
राजपूत समाज का राजनीतिक इतिहास
राजपूत समाज का झुकाव शुरू से ही सनातन संस्कृति और राष्ट्र प्रेम की मानसिकता की वजह से जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की ओर रहा है। 1967 में कलानौर विधानसभा क्षेत्र से जनसंघ के टिकट पर निर्वाचित हुए ठाकुर नसीब सिंह और 1968 के चुनाव में घरौंडा से ठाकुर रणधीर सिंह राणा जैसे नेताओं ने समाज का प्रतिनिधित्व किया है।
हालिया विधानसभा चुनाव और योगदान
सभा के अध्यक्ष राव नरेश चौहान ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में राजपूत उम्मीदवारों की भागीदारी का उल्लेख किया। भाजपा ने नूह, असंध और रादौर क्षेत्रों से तीन राजपूत उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें से श्याम सिंह राणा और योगेन्द्र सिंह राणा निर्वाचित हुए। नूह में कँवर संजय सिंह ने भी मजबूत चुनावी लड़ाई लड़ी।
राज्यसभा की खाली सीट पर दावेदारी
श्याम सिंह राणा को कैबिनेट मंत्री बनाकर पिछले 24 साल की कमी को पूरा किया गया है। राव नरेश चौहान ने मांग की है कि हरियाणा की खाली हुई राज्यसभा सीट पर राजपूत समाज के किसी योग्य सदस्य को, जो आपातकाल में जेल यातना सह चुके हैं या पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से हों, अवसर दिया जाना चाहिए।
राजपूत समाज की यह पहल न केवल उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी को बढ़ाने का प्रयास ,
हरियाणा राजपूत समाज की यह पहल न केवल उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी को बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि यह भाजपा की राजनीति में उनके योगदान को भी दर्शाता है। इस मांग के जरिए समाज की आवाज को सशक्त किया जा रहा है, जिससे उनकी मान्यता और प्रभावी राजनीतिक भागीदारी की उम्मीद की जा सकती है।