
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस समय प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है। हवा की गति धीमी होने की वजह से वायु गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है, और अगले दो दिनों तक यही स्थिति बने रहने की संभावना है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 352 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है।
वायु गुणवत्ता में सुधार की कोई उम्मीद नहीं
दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकांश बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर गंभीर स्थिति में है। एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम समेत अन्य शहरों का एक्यूआई भी 200 से 300 के बीच है, जो “खराब” श्रेणी में आता है। सफ़दरजंग एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह सात बजे दृश्यता 700 मीटर तक गिर गई, जबकि पालम एयरपोर्ट पर सुबह साढ़े सात बजे तक दृश्यता 1000 मीटर थी। यह स्थिति वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक रही, क्योंकि धुंध के कारण सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में पराली जलाना, ट्रांसपोर्ट का धुआं, और कूड़ा जलाना शामिल हैं। डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के मुताबिक, हवा में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 15.313 फीसदी के स्तर पर है, जो सबसे बड़ा योगदान है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 12.122 फीसदी है, और कूड़ा जलने से होने वाला प्रदूषण 1.138 फीसदी है।
आगे क्या होगा?
CPCB और अन्य पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक़्त वायु प्रदूषण की स्थिति में कोई बड़ा सुधार होने की उम्मीद नहीं है। बृहस्पतिवार (14 नवंबर) तक दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर कमोबेश यही रहेगा। सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे खांसी, गला बैठना, आंखों में जलन, और सांस में कठिनाई जैसी समस्याएं बनी रहेंगी। इससे सबसे ज्यादा असर बच्चों, वृद्धों और सांस के मरीजों पर पड़ सकता है।
क्या करें लोग?
वर्तमान प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों से बाहर निकलते वक्त मास्क पहनने और अपने स्वास्थ्य का खास ध्यान रखने की सलाह दी है। खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता है जिनका श्वसन तंत्र कमजोर है या जो पहले से हृदय या फेफड़ों की समस्याओं से ग्रसित हैं।
इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने स्कूलों को भी अलर्ट किया है और बच्चों को बाहर खेलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही, निजी वाहनों की संख्या कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
समाप्ति की कोई उम्मीद?
राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने पहले ही एक्शन प्लान तैयार किया है। हालांकि, हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषण में कोई बड़ा बदलाव तुरंत संभव नहीं है, और इसे सुधारने के लिए लंबी अवधि के उपायों की आवश्यकता है। पराली जलाने और निर्माण कार्यों में नियंत्रण के अलावा, आगामी मौसम में ठंडी हवाओं के प्रभाव से प्रदूषण में कुछ हद तक कमी हो सकती है, लेकिन तत्काल राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।