
- चंद्रमा आज अश्विनी नक्षत्र के तीन चरणों में प्रवेश करेगा,
जय श्री कृष्ण
🕉 श्री गणेशाय नमः
आज के दिन की विशेष जानकारी, ग्रहों की स्थिति, शुभ और अशुभ समय, और पौराणिक महत्व से संबंधित जानकारी निम्नलिखित है:
विक्रम संवत 2081
- संवत्सर नाम: कालयुक्त
- संवत्सर राजा: मंगल
- संवत्सर मंत्री: शनि
दिनांक और तिथि
- तिथि: कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी (चतुर्दशी तिथि का क्षय)
- पंचांग: आज का दिन गुरुवार है।
- सूर्य का उदय: प्रातः 6:47 बजे
- सूर्य का अस्त: सायं 5:24 बजे
- ऋतु: हेमंत
- सूर्य का मार्ग: दक्षिणायन
ग्रहों की स्थिति
- चंद्रमा:
- राशि: मेष
- नक्षत्र: अश्विनी (आज तीन चरणों में चंद्रमा का नक्षत्र परिवर्तन होगा)
- नक्षत्र स्वामी: केतू
- सूर्य:
- राशि: तुला
- नक्षत्र: चित्रा (चरण 3)
- नक्षत्र स्वामी: गुरु
- मंगल:
- राशि: कर्क
- नक्षत्र: पुष्य (चरण 2)
- नक्षत्र स्वामी: शनि
- बुद्ध:
- राशि: वृश्चिक
- नक्षत्र: ज्येष्ठा (चरण 2)
- नक्षत्र स्वामी: बुध (अस्त)
- गुरु (वक्री):
- राशि: वृष
- नक्षत्र: मृगशिरा (चरण 1)
- नक्षत्र स्वामी: मंगल
- शुक्र:
- राशि: धनु
- नक्षत्र: मूल (चरण 3)
- नक्षत्र स्वामी: केतु
- शनि (वक्री):
- राशि: कुंभ
- नक्षत्र: शतभिषा (चरण 4)
- नक्षत्र स्वामी: राहु
- राहु:
- राशि: मीन
- नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद (चरण 2)
- नक्षत्र स्वामी: शनि
- केतु:
- राशि: कन्या
- नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी (चरण 4)
- नक्षत्र स्वामी: सूर्य
विशेष स्थिति और महत्वपूर्ण समय:
- आज का योग:
- सिद्ध योग: प्रातः 11:30 बजे तक (यह समय विशेष रूप से शुभ और कार्यों के लिए उपयुक्त होता है)
- व्याघात योग: सिद्ध योग के बाद व्याघात योग का प्रभाव रहेगा, जो शुभ कार्यों में विघ्न डाल सकता है।
- राहु काल:
- समय: दोपहर 1:26 बजे से 2:46 बजे तक
- विशेष सावधानी: इस समय के दौरान कोई नया कार्य या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
- गण्डमूल:
- समय: रात्रि 12:33 तक
- सावधानी: गण्डमूल के समय विशेष रूप से यात्रा या कोई भी नया कार्य शुरू करना वर्ज्य माना जाता है।
- आज का नक्षत्र:
- चंद्रमा आज अश्विनी नक्षत्र के तीन चरणों में प्रवेश करेगा, जिससे निर्णय लेने में सावधानी रखने की आवश्यकता है।
- नक्षत्र स्वामी: केतू, जो मस्तिष्क में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति बना सकता है।
- शुभ दिशा:
- पूर्व, उत्तर, और पूर्व-उत्तर दिशा की यात्रा आज शुभ मानी जाती है।
- दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें, अगर आवश्यक हो तो दही खाकर यात्रा करें।
धार्मिक महत्व:
- वैकुण्ठ चतुर्दशी:
- यह दिन विशेष रूप से भगवान शिव और विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन जो व्यक्ति विधिपूर्वक पूजा करता है, उसे मोक्ष प्राप्ति का वरदान मिलता है। उनके जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
- यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के उपासकों के लिए अत्यधिक लाभकारी होता है।
दैनिक लग्न सारणी (दिनभर का समय):
- प्रातः 6:56 तक – तुला
- 9:14 तक – वृश्चिक
- 11:28 तक – धनु
- दोपहर 1:01 तक – मकर
- 2:29 तक – कुम्भ
- 3:53 तक – मीन
- सायं 5:29 तक – मेष
- 7:24 तक – वृष
- रात्रि 9:38 तक – मिथुन
- 11:59 तक – कर्क
- 2:17 तक – सिंह
- 4:33 तक – कन्या
भगवान शिव और विष्णु की पूजा का महत्व अधिक है।
आज का दिन विशेष ध्यान देने योग्य है। ग्रहों की स्थिति से पता चलता है कि कुछ समय विशेष (जैसे सिद्ध योग) में शुभ कार्य करना उपयुक्त रहेगा, जबकि Cविशेष रूप से वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन भगवान शिव और विष्णु की पूजा का महत्व अधिक है। पूजा और साधना से शांति और समृद्धि मिल सकती है।
आपका दिन शुभ और मंगलमय हो। 🌸