
नई दिल्ली, 15 नवंबर – सोने और चांदी के रेटों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट आई है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इन धातुओं की कीमतों में आयी यह गिरावट वैश्विक आर्थिक स्थितियों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट निवेशकों के लिए एक चेतावनी का संकेत हो सकती है, जो इन धातुओं में निवेश कर रहे हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक स्थितियों में सुधार और निवेशकों की रुख में बदलाव ने इन धातुओं की मांग को कम किया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों को दबाया है, क्योंकि डॉलर के मुकाबले इन धातुओं की कीमतें घट जाती हैं।
सोने के रेट में गिरावट
सोने की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर से गिरकर 3 साल की सबसे निचली स्थिति पर पहुंच गई हैं। 10 ग्राम सोने की कीमत 60,000 रुपये के आसपास रही है, जो पिछले तीन सालों में सबसे बड़ी गिरावट है।
चांदी की कीमत में भी भारी गिरावट
चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है, और चांदी का रेट 1,000 रुपये प्रति किलो तक घट चुका है। इस साल के पहले कुछ महीनों में चांदी की कीमत 75,000 रुपये प्रति किलो के करीब थी, लेकिन अब यह 68,000 रुपये तक पहुंच चुकी है, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
सोने और चांदी की गिरती कीमतें उन निवेशकों के लिए एक झटका हो सकती हैं जिन्होंने इन धातुओं में निवेश किया था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, और आने वाले महीनों में इनकी कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है, खासकर अगर वैश्विक आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव होता है।
क्या करें निवेशक?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का पुनर्निर्धारण करने की जरूरत है। यदि आप सोने या चांदी में निवेश करना चाहते हैं, तो इस गिरावट का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के लिए निवेश करने से पहले बाजार के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण होगा।