
नई दिल्ली, 16 नवंबर: दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या एक बार फिर गंभीर हो गई है, जिससे शहर की हवा जहरीली हो गई है और लाखों परिवारों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाने का कोई संकेत नहीं मिला है। वहीं, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली में प्रतिबंधित वाहन खुलेआम फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं।
ग्रैप-3 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत कई कदम उठाने की घोषणा की थी,
दिल्ली सरकार ने हाल ही में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रैप-3 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत कई कदम उठाने की घोषणा की थी, जिनमें प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पाबंदी शामिल थी। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई की कमी के कारण प्रतिबंधित वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार ने परिवहन विभाग को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं और इसके तहत 84 एनफोर्समेंट टीमें और 280 ट्रैफिक पुलिस टीमें बनाई गई हैं।
कश्मीरी गेट का निरीक्षण:मंत्री गोपाल राय ने शनिवार को कश्मीरी गेट आईएसबीटी का औचक निरीक्षण किया
इस बीच, दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शनिवार को कश्मीरी गेट आईएसबीटी का औचक निरीक्षण किया और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों से सख्ती से काम करने को कहा। उनके साथ परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली से सटे राज्यों से बीएस-4 डीजल बसों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद वे लगातार दिल्ली आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदूषण बढ़ाने का काम पड़ोसी राज्यों की सरकारें कर रही हैं।
बीएस-4 डीजल बसों पर कार्रवाई:एनफोर्समेंट टीम ने हरियाणा और उत्तराखंड से आने वाली बीएस-4 डीजल बसों का चालान किया
गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली परिवहन विभाग की एनफोर्समेंट टीम ने हरियाणा और उत्तराखंड से आने वाली बीएस-4 डीजल बसों का चालान किया है, लेकिन इसके बावजूद इन बसों का दिल्ली में आना जारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ने में इन राज्यों का बड़ा योगदान है। उन्होंने केंद्रीय विज्ञान संस्थान (CSE) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली से आता है, जबकि बाकी प्रदूषण पड़ोसी एनसीआर के जिलों, जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आता है।
पड़ोसी राज्यों की भूमिका: उत्तर प्रदेश से आनंद विहार बस अड्डे पर डीजल बसों की आवक बढ़ने से प्रदूषण में इजाफा हो रहा है।
गोपाल राय ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश से आनंद विहार बस अड्डे पर डीजल बसों की आवक बढ़ने से प्रदूषण में इजाफा हो रहा है। इसी तरह, हरियाणा और राजस्थान से भी डीजल वाहनों की दिल्ली में आना जारी है, जो दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण की कोशिशों को कमजोर कर रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए विंटर एक्शन प्लान के तहत सक्रिय रूप से काम कर रही है, लेकिन जब तक पड़ोसी राज्यों की सरकारें इस मुद्दे पर सख्त कदम नहीं उठातीं, तब तक समस्या का समाधान मुश्किल होगा।
दिल्ली सरकार की नीतियां और पड़ोसी राज्यों के रवैये के बीच विरोधाभास
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जैसे ऑड-ईवन योजना, बीएस-6 पेट्रोल और डीजल वाहनों का प्रयोग और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध। हालांकि, इन प्रयासों को न केवल दिल्ली के भीतर, बल्कि आसपास के राज्यों से भी सहयोग की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार ने बार-बार पड़ोसी राज्यों से आग्रह किया है कि वे भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएं, लेकिन फिलहाल इन राज्यों की सरकारों का रवैया संतोषजनक नहीं रहा है।
केंद्र सरकार की निष्क्रियता:केंद्र सरकार की तरफ से प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ठोस कदम नहीं
इस बीच, केंद्र सरकार की तरफ से प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, और पर्यावरण मंत्री ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों का सहयोग नहीं मिला, तो दिल्ली सरकार के प्रयासों को ज्यादा सफलता नहीं मिल पाएगी।
पड़ोसी राज्यों से अपेक्षित सहयोग की कमी बनी हुई है।
दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन केंद्र और पड़ोसी राज्यों से अपेक्षित सहयोग की कमी बनी हुई है। खासतौर पर, प्रतिबंधित वाहनों की दिल्ली में अनियंत्रित आवाजाही और पड़ोसी राज्यों द्वारा प्रदूषण बढ़ाने के कारण दिल्ली सरकार के प्रयासों में कमी आ रही है। इस स्थिति को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने और सख्ती से नियमों को लागू करने और पड़ोसी राज्यों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है, ताकि राजधानी की हवा को फिर से साफ किया जा सके।