
🕉 श्री गणेशाय नमः, जय श्री कृष्ण
सब सुखी व स्वस्थ रहें 🌱🌹
विक्रम संवत 2081
- संवत्सर नाम: कालयुक्त
- संवत्सर राजा: मंगल
- संवत्सर मंत्री: शनि
सूर्य और ऋतु
- सूर्य: दक्षिणायन
- ऋतु: हेमंत
- सूर्य उदय: प्रातः 6:49
- सूर्य अस्त: सायं 5:23
मास और तिथि
- मास: मार्गशीर्ष
- पक्ष: कृष्ण
- तिथि: द्वितीया
- अंग्रेजी तिथि: 17 नवम्बर 2024 (रविवार)
चंद्रमा की स्थिति
- चंद्रमा राशि: वृष
- राशि स्वामी: शुक्र
- आज का नक्षत्र: रोहिणी (सायं 5:23 तक), उसके बाद मृगशिरा
- नक्षत्र स्वामी: चंद्र और मंगल
चंद्रमा का नक्षत्र प्रवेश
- प्रातः 6:29 बजे से रोहिणी नक्षत्र के चरण 3 में
- दोपहर 12:00 बजे से रोहिणी नक्षत्र के चरण 4 में
- सायं 5:23 बजे से मृगशिरा नक्षत्र के चरण 1 में
- रात्रि 10:56 बजे से मृगशिरा नक्षत्र के चरण 2 में
योग
- शिव योग: रात्रि 8:21 बजे तक
- सिद्ध योग: उसके बाद
शुभ दिशाएँ और दिशा शूल
- शुभ दिशाएँ: पूर्व, उत्तर, दक्षिण-पूर्व
- दिशा शूल: पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करने से बचें। यदि आवश्यक हो, तो दलिया और घी खाकर यात्रा करें।
ग्रहों की स्थिति:
- सूर्य:
- राशि: वृश्चिक
- नक्षत्र: विशाखा चरण 4
- नक्षत्र स्वामी: गुरु
- मंगल:
- राशि: कर्क
- नक्षत्र: पुष्य चरण 2
- नक्षत्र स्वामी: शनि
- बुद्ध (मार्गी, अस्त):
- राशि: वृश्चिक
- नक्षत्र: ज्येष्ठा चरण 2
- नक्षत्र स्वामी: बुद्ध
- गुरु (वक्री):
- राशि: वृष
- नक्षत्र: मृगशिरा चरण 1
- नक्षत्र स्वामी: मंगल
- शुक्र:
- राशि: धनु
- नक्षत्र: मूल चरण 4 (प्रातः 8 बजे से पूर्वाषाढ़ा चरण 1 तक)
- नक्षत्र स्वामी: केतु
- शनि:
- राशि: कुंभ
- नक्षत्र: शतभिषा चरण 4
- नक्षत्र स्वामी: राहु
- राहु:
- राशि: मीन
- नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद चरण 2
- नक्षत्र स्वामी: शनि
- केतु:
- राशि: कन्या
- नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी चरण 4
- नक्षत्र स्वामी: सूर्य
राहु काल
- राहु काल: सायं 4:06 बजे से 5:26 बजे तक
इस समय के दौरान कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू न करें। राहु काल के दौरान यात्रा, शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें।
दैनिक लग्न सारणी
- प्रातः 6:43 तक: तुला
- 9:02 तक: वृश्चिक
- 11:06 तक: धनु
- दोपहर 12:49 तक: मकर
- 2:17 तक: कुंभ
- 3:41 तक: मीन
- सायं 5:17 तक: मेष
- 7:12 तक: वृष
- रात्रि 9:26 तक: मिथुन
- 11:47 तक: कर्क
- 2:05 तक: सिंह
- 4:21 तक: कन्या
श्लोक का अर्थ
भगवान सूर्य अपनी अनन्त किरणों से सुशोभित हैं।
भगवान सूर्य अपनी अनन्त किरणों से सुशोभित हैं।
भगवान सूर्य अपनी अनन्त किरणों से सुशोभित हैं। ये नित्य उदय होने वाले (समुद्यन्), देवता और असुरों से नमस्कृत, विवस्वान् नाम से प्रसिद्ध, प्रभा का विस्तार करने वाले (भास्कर) और संसार के स्वामी (भुवनेश्वर) हैं। तुम इनका (रश्मिमते नमः, समुद्यते नमः, देवासुरनमस्कृताय नमः, विवस्वते नमः, भास्कराय नमः, भुवनेश्वराय नमः इन नाम मंत्रों के द्वारा) पूजन करो।
भगवान सूर्य के इस श्लोक के माध्यम से उनकी दिव्य शक्ति और प्रकाश का वर्णन किया गया है। सूर्य देव का पूजन स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।