
नई दिल्ली, 21 नवंबर:
अदाणी समूह फिर से विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अन्य समूह के अधिकारियों पर 2020 से 2024 के बीच भारतीय सरकारी अधिकारियों को सौर ऊर्जा अनुबंधों को हासिल करने के लिए 25 करोड़ डॉलर से अधिक की रिश्वत देने का आरोप लगाया है। इस रिश्वत के बदले अदाणी समूह को अनुमानित रूप से दो अरब डॉलर से अधिक का लाभ हो सकता था। यह मामला अदाणी समूह की वित्तीय गतिविधियों और उसके व्यापारिक संबंधों पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
इन अनुबंधों से अदाणी समूह को बड़ा वित्तीय लाभ हो सकता था।
अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, अदाणी समूह ने भारत के सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी, ताकि वे सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सरकार से अनुकूल अनुबंध हासिल कर सकें। इन अनुबंधों से अदाणी समूह को बड़ा वित्तीय लाभ हो सकता था। आरोप यह भी है कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा सागर अदाणी और अन्य समूह के अधिकारियों द्वारा रिश्वत के रूप में भारतीय अधिकारियों को दिया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन परियोजनाओं के लिए उनकी कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए।
सौर ऊर्जा अनुबंध और लाभ
जिसमें से अनुमानित दो अरब डॉलर का लाभ मिलने की संभावना थी।
अदाणी समूह भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ियों में से एक है, और यह क्षेत्र भारतीय सरकार की प्राथमिक योजनाओं में से एक है। इन सौर ऊर्जा अनुबंधों से अदाणी समूह को बड़े लाभ की संभावना थी, जिसमें से अनुमानित दो अरब डॉलर का लाभ मिलने की संभावना थी। इन परियोजनाओं में सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी और अन्य फायदे भी शामिल हो सकते थे।
किसे रिश्वत दी गई?
अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि रिश्वत भारतीय सरकारी अधिकारियों को दी गई, हालांकि उन्होंने उन अधिकारियों के नाम का खुलासा नहीं किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल व्यापारिक हितों को साधने का मामला था या फिर इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य भी थे।
अदाणी समूह का रुख
अदाणी समूह ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे निराधार बताया है। समूह का कहना है कि उनके सभी व्यापारिक लेन-देन पूरी तरह से कानूनी, पारदर्शी और सही प्रक्रिया के तहत हुए हैं। हालांकि, इस तरह के गंभीर आरोपों के बाद समूह पर जांच और राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक साजिश का आरोप
कुछ राजनीतिक और व्यापारिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह आरोप संभवतः राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकते हैं, क्योंकि अदाणी समूह का नाम भारतीय राजनीति में प्रमुख रूप से उभरता है और यह समूह कई बार सरकार के करीबी रिश्तों को लेकर चर्चा में रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला है, और यह आरोप लगाए हैं कि सरकार की नीतियों से समूह को फायदा हुआ है।
मनोहर लाल खट्टर सरकार के समय का संदर्भ
अदाणी समूह और मनोहर लाल खट्टर के समय भी विवादों का कारण रहे हैं। पहले यह आरोप लगाए गए थे कि खट्टर सरकार ने अदाणी समूह को कई बड़े प्रोजेक्ट्स देने में अनुकूलता दिखाई, जो अब इस नए मामले से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
भारतीय राजनीति और व्यापार जगत में एक नया मोड़
अदाणी समूह पर रिश्वत देने और धोखाधड़ी के आरोप भारतीय राजनीति और व्यापार जगत में एक नया मोड़ ला सकते हैं। अब यह देखना होगा कि अमेरिकी और भारतीय जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कैसे करती हैं और इससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। यह मामला न केवल अदाणी समूह की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र और भारतीय व्यापार जगत के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।