
मुख्यमंत्री कार्यालय में वापसी की कोशिशें तेज हो गई हैं
जिनकी वजह से कई बार पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर की किरकिरी भी हो चुकी थी।
चंडीगढ़, 22 नवंबर: हरियाणा में मुख्यमंत्री कार्यालय में नई नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है, और प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। कई ऐसे नेता और अधिकारी जो पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समय सत्ता में बड़े पदों पर थे, अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यालय में वापस आने के लिए सक्रिय हो गए हैं। इन नेताओं के प्रयासों से मुख्यमंत्री कार्यालय में वापसी की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिनकी वजह से कई बार पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर की किरकिरी भी हो चुकी थी। अब वही अधिकारी और नेता एक बार फिर सत्ता में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव:
वे सत्ता परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं छोड़ते।
हरियाणा की राजनीति में, खासकर मुख्यमंत्री पद से संबंधित निर्णयों में अक्सर बदलाव होता रहता है। जो नेता एक बार प्रभावशाली पदों पर विराजमान होते हैं, वे सत्ता परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं छोड़ते। यहां तक कि उनकी उम्र बढ़ने के बावजूद वे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। मनोहर लाल खट्टर के समय में कई ऐसे लोग थे जो सत्ता में रहते हुए बड़े पदों पर थे और अब वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यालय में अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जब मुख्यमंत्री बदलते हैं, तो पुराने लोग सत्ता में अपनी प्रभावशाली स्थिति को बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं, भले ही वह नए मुख्यमंत्री के सामने विवाद खड़ा करते हों।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने चुनौतियाँ:
वे अपने आकाओं को जानकारी दे सकें।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। सत्ता में परिवर्तन के बाद, पुराने नेता और कार्यकर्ता जिन्हें पार्टी के लिए संघर्ष करना पड़ा, अब सत्ता में अपनी जगह फिर से पक्की करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे कार्यकर्ता अब मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उन्हें भी पता चल सके कि मुख्यमंत्री कार्यालय में क्या चल रहा है और वे अपने आकाओं को जानकारी दे सकें।
मुख्यमंत्री सैनी ने इस बारे में सख्त निर्णय लिया है
हालांकि, मुख्यमंत्री सैनी ने इस बारे में सख्त निर्णय लिया है कि ऐसे नेताओं को दूर रखा जाए, जिन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष नहीं किया और केवल सत्ता में अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास में लगे रहे। सैनी सरकार ने इन नेताओं को बाहर करने की कोशिशें की हैं, लेकिन यह राजनीतिक स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।
क्या नायब सिंह सैनी खट्टर के पद चिन्हों पर चलेंगे?
अब यह सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी क्या पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पद चिन्हों पर चलेंगे या फिर अपना अलग रास्ता अपनाएंगे। हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री सैनी की कार्यशैली खट्टर के तरीके से काफी मिलती-जुलती नजर आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि मुख्यमंत्री सैनी अभी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुए हैं, और अधिकतर फैसले खट्टर के दिशा-निर्देशों पर ही लिए जा रहे हैं।
ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी स्वतंत्रता कैसे स्थापित करते हैं और क्या वे खट्टर के पद चिन्हों से हटकर नए दिशा-निर्देश जारी करेंगे। राज्य की जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पर नजर बनाए हुए हैं।
नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी स्वतंत्रता कैसे स्थापित करते हैं
हरियाणा में राजनीतिक संघर्ष और सत्ता के भीतर उथल-पुथल का दौर चलता रहेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की वापसी की कोशिशें जारी हैं। अब देखना होगा कि सैनी अपने नेतृत्व में प्रदेश को किस दिशा में लेकर जाते हैं और क्या वे खट्टर के प्रभाव से बाहर निकल पाते हैं या नहीं।