
कई स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी टल गई हैं।
गाजियाबाद, 22 नवंबर:
गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार होने के बावजूद, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने 12 दिसंबर तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि सभी स्कूलों में फिलहाल ऑनलाइन कक्षाएं ही चलेंगी। इसके कारण कई स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी टल गई हैं। यह आदेश आगामी निर्देश तक लागू रहेगा।
ऑनलाइन पढ़ाई और सरकारी दफ्तरों का समय:
गाजियाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए डीएम ने राज्य सरकार के कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया है। अब राज्य सरकार के दफ्तरों में सुबह 10:30 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक काम होगा। वहीं, नगर निगम कार्यालयों का समय भी बदलकर सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक कर दिया गया है। इसके अलावा, ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) 4 के तहत पाबंदियां लागू रहेंगी। नगर निगम को विशेष जिम्मेदारी दी गई है, ताकि वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
स्कूल बंद होने का आदेश:
बेसिक शिक्षा विभाग ने कहा है कि कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी
गाजियाबाद में प्रदूषण के कारण तीन दिन पहले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया था। उस वक्त एक्यूआई 400 के पार चला गया था। हालांकि, वायु गुणवत्ता में सुधार आने के बावजूद डीएम ने यह आदेश जारी रखा कि अगले आदेश तक स्कूल नहीं खोले जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने कहा है कि कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी, हालांकि शिक्षक स्कूलों में आकर काम करेंगे।
लोनी की स्थिति:
लोनी क्षेत्र की हवा सबसे खराब मानी जाती है,
गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में थोड़ा सा सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी 400 के पार है, जो कि 402 दर्ज किया गया। दो दिन पहले यहां का AQI 500 के पार चला गया था। लोनी क्षेत्र की हवा सबसे खराब मानी जाती है, और यहां बड़ी संख्या में अवैध फैक्टरियां हैं, जहां तार जलाए जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। इस मुद्दे को विजिलेंस कमेटी की बैठक में भी उठाया गया है, लेकिन इस पर कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं।
लेकिन अब भी वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति में बनी हुई है।
गाजियाबाद में प्रदूषण की स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन अब भी वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति में बनी हुई है। इस वजह से स्कूलों को ऑनलाइन चलाने का आदेश जारी किया गया है और सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन ने ग्रैप 4 के तहत कड़ी पाबंदियां जारी रखी हैं, ताकि प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सके और लोगों की सेहत पर इसका असर न पड़े।