
नई दिल्ली, 22 नवंबर: दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जिससे राजधानी में सांसों पर संकट छा गया है। गुरुवार को मौसम में बदलाव के कारण दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। यह स्थिति आठ दिन बाद फिर से उत्पन्न हुई है, और कई इलाकों में वायु गुणवत्ता “गंभीर” श्रेणी में दर्ज की गई है। दिल्ली के कई हिस्सों में आज वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक माना जाता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में AQI के स्तर इस प्रकार थे:
आनंद विहार: 411
मुंडका: 402
बवाना: 411
अशोक विहार: 396
आईटीओ: 348
जहांगीरपुरी: 428
रोहिणी: 398
नजफगढ़: 354
आरकेपुरम: 374
पंजाबी बाग: 393
सोनिया विहार: 401
द्वारका सेक्टर 8: 382
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली के अधिकतर हिस्सों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक हो सकता है। इस स्थिति में श्वसन समस्याएं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, दिल्ली में दृश्यता भी कम हो गई है और भारी धुंआ शहर के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे रहा है।
प्रदूषण का कारण:
वाला धुंआ, खेतों में पराली जलाना
प्रदूषण के स्तर में वृद्धि के कारणों में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां जैसे कि वाहनों का बढ़ता दबाव, उद्योगों से निकलने वाला धुंआ, खेतों में पराली जलाना, और मौसम की स्थिति में बदलाव शामिल हैं। सर्दी का मौसम आने के साथ हवा में नमी और ठंडक के कारण प्रदूषण के कणों का फैलाव अधिक हो रहा है, जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव:
प्रदूषण का असर खासकर बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रदूषण का असर खासकर बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा और दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक इस प्रदूषण के संपर्क में रहने से श्वसन तंत्र में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया:
दि खेतों में पराली जलाने पर रोक नहीं लगाई जाती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
दिल्ली सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक, निर्माण सामग्री की ढुलाई के समय धूल नियंत्रण, वाहनों से उत्सर्जन को नियंत्रित करने के उपाय और हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अन्य कदम शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेतों में पराली जलाने पर रोक नहीं लगाई जाती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर असर
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, और इसके कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रशासन और सरकार को प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर काम करना होगा, ताकि आने वाले समय में प्रदूषण के स्तर को काबू किया जा सके और राजधानी के निवासियों को शुद्ध हवा मिल सके।