
77वें महाराणा के रूप में राज्याभिषेक प्राप्त हुआ।
जयपुर, राजस्थान – 28 नवंबर 2024/ राजस्थान का मेवाड़ घराना, जिसे विश्व में सबसे प्राचीन राजवंशों में गिना जाता है, इस समय एक बड़े संपत्ति विवाद के कारण चर्चा में है। यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि सोमवार रात उदयपुर के राजघराने के दो परिवारों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस विवाद में नामी परिवार के सदस्य और पूर्व राजपरिवार के उत्तराधिकारी शामिल हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब भाजपा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ को मेवाड़ के 77वें महाराणा के रूप में राज्याभिषेक प्राप्त हुआ। इसके बाद संपत्ति को लेकर यह मामला सार्वजनिक हो गया और अब इसे लेकर पूरे राज्य में हलचल मची हुई है।
मेवाड़ घराना: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर
मेवाड़ घराना भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और इसे भारत के सबसे पुराने राजवंशों में से एक माना जाता है। बप्पा रावल, महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा जैसे महान योद्धाओं और शूरवीरों से जुड़े इस घराने की ऐतिहासिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। मेवाड़ घराना अपने शासकों की अद्वितीय शौर्य गाथाओं के लिए प्रसिद्ध है, जिन्होंने मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों से अपनी भूमि और संस्कृति की रक्षा की।
मेवाड़ कभी एक स्वतंत्र राज्य हुआ करता था, जो राजस्थान के राजपूताना क्षेत्र में स्थित था। बाद में यह राज्य एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा और इसकी राजधानी उदयपुर बनी। मेवाड़ का इतिहास गुहिल राजवंश से शुरू हुआ, और इसके बाद सिसोदिया राजवंश ने इसका शासन संभाला।
19वीं शताब्दी में इसे उदयपुर राज्य के रूप में पहचाना गया। यह राजवंश मुख्य रूप से भगवान शिव के स्वरूप एकलिंगनाथ जी के ट्रस्टी के रूप में काम करता था। बप्पा रावल ने मेवाड़ की स्थापना की थी और उन्होंने राज्य के शासन के प्रमुख नियमों को निर्धारित किया था। इसके बाद से मेवाड़ के शासक हमेशा महाराणा के रूप में सम्मानित किए गए, जबकि अन्य राज्यों के शासकों को महाराजा के नाम से जाना जाता था।
संपत्ति विवाद: शुरुआत और विकास
यह विवाद तब उभरकर सामने आया जब विश्वराज सिंह मेवाड़ को मेवाड़ के 77वें महाराणा के रूप में राज्याभिषेक किया गया। इसके बाद, मेवाड़ के राजघराने में संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर मतभेद सामने आए। यह विवाद इतना बढ़ा कि सोमवार रात उदयपुर में मेवाड़ राजघराने के दो प्रमुख परिवारों के बीच झड़प हो गई। यह संघर्ष उस समय और भी गंभीर हो गया जब दोनों परिवारों के सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान देने लगे।
मेवाड़ राजघराने में यह संपत्ति विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है, और इससे जुड़ी कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है। यह स्थिति मेवाड़ परिवार के भीतर सत्ता और संपत्ति के बंटवारे को लेकर गहरी असहमति को उजागर करती है।
मेवाड़ की सांस्कृतिक धरोहर
मेवाड़ राजघराना का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है। इस घराने का वजूद केवल एक शाही घराने के रूप में नहीं, बल्कि राजपूतों के गौरव और उनकी संस्कृति का प्रतीक है। मेवाड़ के शासकों का महाराणा के रूप में संबोधन भारतीय समाज में उनकी शक्ति, सम्मान और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दर्शाता है।
‘द हाउस ऑफ मेवाड़’ किताब में मेवाड़ के ऐतिहासिक महत्व और उसकी संस्कृति के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस पुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे मेवाड़ के शासक भगवान एकलिंगनाथ के ट्रस्टी के रूप में कार्य करते थे। यह अवधारणा मेवाड़ के शासकों को अन्य राजवंशों से अलग करती है, क्योंकि वे हमेशा भगवान शिव के एक स्वरूप के रूप में अपना कार्य करते थे, न कि एक पारंपरिक राजा के रूप में।
भारत में राजशाही और “महाराणा” का महत्व
भारत में अधिकांश रियासतों के शासकों को “महाराजा” कहा जाता था, लेकिन मेवाड़ जैसे कुछ राजघरानों के शासकों को “महाराणा” के रूप में सम्मानित किया गया। यह शब्द “राणा” एक विशेष सम्मान का प्रतीक है, जो केवल मेवाड़ जैसे प्राचीन राजघरानों के शासकों को प्राप्त था। यह उच्च पदवी महाराणा प्रताप जैसे महान शासकों के नाम से जुड़ी हुई है, जिन्होंने मुगलों से संघर्ष किया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।
राजस्थान के मेवाड़ घराने में चल रहे संपत्ति विवाद ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। यह विवाद अब केवल एक संपत्ति मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेवाड़ राजघराने के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव को लेकर चल रही एक राजनैतिक और कानूनी लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद का समाधान कैसे होता है, और क्या मेवाड़ घराना अपनी ऐतिहासिक प्रतिष्ठा और शौर्य को फिर से स्थापित कर पाएगा।
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