
संभल, उत्तर प्रदेश – 28 नवंबर 2024 / उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में हुई हिंसा पर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई जा रही है कि मस्जिद के पीछे भीड़ कैसे इकट्ठी हुई और क्या इस हिंसा की पूर्व से कोई योजना थी। इन सवालों के बीच, संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि हिंसा के समय के जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें यह साफ दिखता है कि किसी ने भी उस भीड़ को रोकने या समझाने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय, जो भी व्यक्ति इन घटनाओं के गवाह बने, वे भी उस हिंसक भीड़ का हिस्सा बन गए। एसपी ने यह भी कहा कि यदि वक्त रहते प्रयास किए जाते तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं घटती।
उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर उपद्रवी 50 साल से कम उम्र के थे, और कुछ तो केवल 30 साल के थे। पुलिस ने यह जानकारी भी दी कि उपद्रवियों ने नकाब पहनकर फायरिंग की और उनके पास देसी तमंचे भी थे, जो सीसीटीवी फुटेज में साफ देखे गए।
हिंसा और नुकसान का आकलन
संभल में हिंसा के बाद, शहर धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन अभी भी सतर्क है। बिजली विभाग को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी अभी तक सही से माप-जोख की जा रही है। प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाए हैं, जैसे कि पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए हैं कि बोतल में पेट्रोल या अन्य वस्तुओं में पेट्रोल न दिया जाए। इसके अलावा, सड़कों पर ईंट-पत्थर रखे जाने पर भी रोक लगा दी गई है, और पालिका की टीम ने इस पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
सपा और कांग्रेस नेताओं पर निगरानी
वहीं, हिंसा के बाद सपा और कांग्रेस नेताओं की निगरानी की जा रही है। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद को धारा 168 का नोटिस भेजा गया है, जिसमें उनका नाम इस हिंसा में शामिल होने का संदेह जताया गया है। इसके अलावा, जियाउर्रहमान बर्क और कुछ सपा नेताओं को भी नोटिस दिए गए हैं और 40 लोगों को मुचलकों से पाबंद किया गया है।
नुकसान की भरपाई और कोर्ट की सुनवाई
डीएम राजेंद्र पैंसिया ने आदेश दिया है कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से की जाएगी। जामा मस्जिद के पास उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ी समेत कई वाहनों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की। इसके साथ ही अन्य सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
आखिरकार, जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के विवाद में शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने बताया कि वह सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा कर रहे हैं, और 29 नवंबर को अदालत में रिपोर्ट पेश की जाएगी। यदि रिपोर्ट की समीक्षा पूरी नहीं हो पाई तो अदालत से समय बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा।
यह मामला उस सिविल विवाद से जुड़ा है, जिसमें हिंदू पक्ष ने मस्जिद की जगह हरिहर मंदिर होने का दावा किया है।
संभल में हुई हिंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें हिंसा के कारणों, उपद्रवियों की योजनाओं, और प्रशासन की तैयारी पर ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई अभी भी जारी है, और मामले की कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है।