
नई दिल्ली, 2 दिसंबर: उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली कूच करने के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली कूच का आह्वान किया है, जिसके बाद किसानों की भीड़ नोएडा से दिल्ली की ओर बढ़ने लगी है। किसानों की प्रमुख मांगें हैं – भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजे में बढ़ोतरी और विकसित भूखंडों का आवंटन। किसानों का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, और इसलिए उन्होंने दिल्ली कूच का फैसला किया है। इस प्रदर्शन के चलते उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा की सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
किसानों की मुख्य मांगें
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित इस आंदोलन में किसानों की मांग है कि उन्हें 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाएं और 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, किसानों ने भूमि अधिग्रहण कानून के सभी लाभों को लागू करने और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को मानने की भी मांग की है। इन मुद्दों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन कई दिनों से जारी है।
पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी
दिल्ली कूच की योजना को देखते हुए, पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नोएडा, दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डरों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली-नोएडा सीमा पर सख्ती बढ़ा दी गई है, जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है, और किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा, नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी कर दी है, जिसमें लोगों से सतर्क रहने और कूच के दौरान संभावित यातायात जाम से बचने की अपील की गई है।
महामाया फ्लाईओवर पर किसानों का जमावड़ा
किसान आज दोपहर 12 बजे महामाया फ्लाईओवर के पास जुटने वाले हैं। इसके बाद, वे दिल्ली की ओर कूच करेंगे। इस कारण नोएडा-Delhi बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और यहां पुलिस की भारी तैनाती की गई है। नोएडा से दिल्ली जाने वाले रास्तों पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
किसान नेताओं की नजरबंदी
किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है ताकि वे इस आंदोलन को और भड़का ना सकें। पुलिस ने 4,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सड़कों पर तैनात किया है ताकि किसी भी प्रकार के उग्र विरोध से बचा जा सके। इसके अलावा, किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर असर
किसानों का यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण बन गया है। यदि सरकार ने किसानों के साथ सख्त व्यवहार किया तो इसका राजनीतिक असर हो सकता है, विशेषकर उत्तर प्रदेश में जहां चुनाव होने हैं। सरकार और किसानों के बीच इस संघर्ष का राजनीतिक दृष्टिकोण से खासा महत्व है।
सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
केंद्र और राज्य सरकारों की सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल जैसे सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों को दिल्ली की सीमाओं से 20 किलोमीटर दूर तैनात किया गया है ताकि किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके।
किसानों का यह आंदोलन अब सरकार और विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार किस तरह से इस आंदोलन को नियंत्रित करती है और किसानों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।