
भिवानी, 5 दिसंबर 2024: भिवानी जिले में एक आपात स्थिति के दौरान तीन युवाओं ने देर रात रक्तदान करके एक मरीज की जान बचाई। यह घटना उस समय हुई जब गांव इंदिवाली के एक व्यक्ति ने शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा से संपर्क किया और बताया कि उसके बेटे को प्लेटलेट्स की सख्त जरूरत है क्योंकि वह ब्लीडिंग से जूझ रहा था।
राजेश डुडेजा ने तत्काल चौ. बंसीलाल अस्पताल के ब्लड बैंक में फोन किया, लेकिन वहां प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं थे। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने सोशल मीडिया समूह में सूचना डाली कि प्लेटलेट्स की आवश्यकता है। इसके बाद, तीन रक्तदाता—भूपेन्द्र सिंह खरक, कृष्ण कुमार हालुवास और राकेश कुमार बापोड़ा—तुरंत अस्पताल पहुंचे और रक्तदान किया, जिससे मरीज की आवश्यक प्लेटलेट्स की पूर्ति हो पाई और उसकी जान बचाई जा सकी।
राजेश डुडेजा ने इस अवसर पर रक्तदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि रक्त का निर्माण किसी फैक्ट्री में नहीं हो सकता, और इसकी पूर्ति केवल रक्तदान के माध्यम से ही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान न केवल जरूरतमंद की जान बचाता है, बल्कि रक्तदान करने वाले को शारीरिक और मानसिक रूप से भी फायदा होता है।
उन्होंने आगे कहा, “रक्तदान एक ऐसा सामाजिक कार्य है, जिसमें कोई पैसे की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह एक ऐसा कार्य है जिससे हम किसी और की जिंदगी बचा सकते हैं और समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।”
इस अवसर पर डॉ. मंदीप पंघाल, लेब टेक्नीशियन नरेंद्र पुनिया और योगेश जांगड़ा भी मौजूद थे, जिन्होंने रक्तदान के महत्व और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में चर्चा की। उन्होंने रक्तदान को एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्तदान के इस पहलू को आगे बढ़ाने के लिए, स्थानीय समाज और संस्थाओं से अपील की गई कि वे इस दिशा में और प्रयास करें ताकि भविष्य में ऐसे कई जीवन बचाए जा सकें।