
ग्रेटर नोएडा, 5 दिसंबर 2024: ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर पिछले कुछ दिनों से चल रहे किसान आंदोलन को पुलिस ने बुधवार रात को जबरन खाली करा दिया है। किसान 25 नवंबर से महापंचायत के बैनर तले यहां धरना दे रहे थे, और उनका मुख्य उद्देश्य भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार, 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, बढ़ा हुआ 64.7 प्रतिशत मुआवजा और नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग करना था। इस धरने में संयुक्त किसान मोर्चा के तहत करीब 10 से अधिक किसान संगठन शामिल थे। अब पुलिस ने धरनास्थल को खाली कर दिया है, और इस क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस द्वारा क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है और धरनास्थल पर फिलहाल एक भी किसान मौजूद नहीं है।
किसान नेताओं की गिरफ्तारी, टकराव की संभावना
पुलिस ने धरना स्थल से 34 किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें प्रमुख किसान नेता सुखबीर भी शामिल थे। उन्हें धरने से जबरन उठाकर जेल भेज दिया गया। किसान नेताओं की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर पुलिस और किसानों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पुलिस की कार्रवाई के विरोध में किसान संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है।
किसान आंदोलन के बढ़ते कदम
किसान पहले ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण और यमुना विकास प्राधिकरण के कार्यालयों के बाहर डेरा डाले हुए थे। इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया था और दिल्ली के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से हटा दिया और गिरफ्तार कर लिया।
बुधवार को जीरो प्वाइंट पर आयोजित महापंचायत में किसानों ने लगभग आठ घंटे तक अपनी बात रखी। इस महापंचायत के दौरान, मंगलवार को गिरफ्तार किए गए 126 किसानों को रिहा कर दिया गया था। रिहाई के बाद, ये किसान महापंचायत में शामिल हुए और गुरुवार की महापंचायत में आगे की रणनीति पर विचार किया।
किसान आंदोलन
किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे, और आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार सक्रिय हैं। सरकार की ओर से इस मामले में कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि किसान संगठनों का कहना है कि सरकार अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं करती, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया जाता, वे इस संघर्ष को जारी रखेंगे और देशभर के किसानों को एकजुट करके अपना आंदोलन जारी रखेंगे।