
किसान आंदोलन पर हरियाणा सरकार की सख्ती
चंडीगढ़, 14 दिसंबर: किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा और पंजाब के बीच राजनीतिक गतिरोध बढ़ता जा रहा है। किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें दिल्ली जाने से रोकने की पूरी कोशिश कर रही है। इस पूरे मुद्दे को कांग्रेस से जोड़ते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि यह पूरी योजना कांग्रेस की है, और उनके नेता किसानों को दिल्ली भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था को हाथ में नहीं लेने देगी और किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस नेता बजरंग पुनिया का ऐलान
वहीं, कांग्रेस नेता और किसान आंदोलन के समर्थन में खड़े बजरंग पुनिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और ऐलान किया कि वह किसानों के साथ दिल्ली की ओर कूच करेंगे। उन्होंने अपने एक पोस्ट में कहा, “मैं किसानों के साथ दिल्ली आ रहा हूं और देखना होगा कि क्या हम दिल्ली तक पहुंच पाते हैं, या फिर हमें रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।” बजरंग पुनिया का यह बयान किसान आंदोलन को और जोरदार तरीके से सामने ला रहा है और यह राजनीति में और बढ़ती हुई तकरार को दर्शाता है।
राजनीतिक टकराव और किसान आंदोलन
इस घटनाक्रम ने हरियाणा और पंजाब के बीच राजनीतिक टकराव को और भी बढ़ा दिया है। एक ओर जहां किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाणा सरकार उनका रास्ता रोकने के लिए सक्रिय है। हरियाणा सरकार के इस कदम को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस आंदोलन को अपनी राजनीतिक हितों के लिए बढ़ावा दे रही है। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन जरूरी है।
किसान अपनी आर्थिक स्थिति और कानूनों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, और उनका मानना है कि नए कृषि कानूनों से उन्हें नुकसान होगा। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस नेता बजरंग पुनिया ने किसानों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है, और अब यह देखना होगा कि क्या वह किसानों के साथ दिल्ली तक पहुंचने में सफल हो पाते हैं या फिर हरियाणा सरकार उनकी योजना को विफल कर देती है।
बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका
यह मामला अब सिर्फ एक किसान आंदोलन नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। किसान अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और सरकार इस पर कड़ी नजर रखे हुए है। भाजपा और कांग्रेस के बीच का यह टकराव और किसानों का समर्थन इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना रहा है। अब यह देखना होगा कि आगे आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या किसान अपने आंदोलन में सफल हो पाते हैं।